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आतंकियों, उग्रवादियों के आगे शासन झुका

देवेश प्रताप सिंह राठौर 
(वरिष्ठ पत्रकार)

आज जिस तरह से नागरिकता संशोधन बिल पर देश में बवाल मचा हुआ है , देश में तो शांति है लेकिन देश की राजधानी दिल्ली में जिस तरह से ढाई महीने से आतंक का रूप धारण किया हुआ है वास्तव में एक बहुत ही कानून के नाम से और सरकार के नाम से बहुत बड़ा धब्बा है, आखिर दिल्ली ढाई महीने से क्यों लग रहा है यह बहुत बड़ा प्रश्न है, आज 40 - 42 लोगों की जानें चली गई है उनके घर परिवार बर्बाद हो गए हैं बहुत से लोग शिक्षा दे रहे हैं की भाईचारा बना के रखा जाए हम से पूछना चाहते हैं नागरिकता संशोधन बिल पर बवाल करने वाले कौन लोग हैं कौन देश में बवाल फैलाने के काम कर रहा है इसको जानने का प्रयास नहीं किया जा रहा है बस जातिगत भाव और नेता  राजनीति क्षेत्र को देखते हुए और आप किस पार्टी से जुड़े हुए हैं उस बात को देखते हुए आप एक दूसरे पर आरोप लगा सकते हैं ।क्योंकि आप अंधे हो चुके हैं आपको दिखाई नहीं देता है कि
नागरिकता संशोधन बिल जिस तरह बवाल मचा रखा है उस पर आप किसी धर्म जात से जोड़ने के बाद एक बहुत बड़ी राजनीत में आती है इसमें जो समर्थक नहीं है वही तो बवाल कर रहे हैं और आप उनके पक्ष में बोल कर उनको प्रोत्साहित कर रहे हैं  लोग मिसाल देते हैं मैं भी मिसाल देता हूं मैं उन्नाव कानपुर के पास जिस जिले में रहता हूं वहां 70 परसेंट की आबादी मुसलमान की है लेकिन आज तक हमारे बीच में जिस तरह से भाईचारा रहा है होली हो दीपावली ईद सब ने मिलकर बनाई है आज मैं घर जाता हूं तो मुझे अपने घर से ज्यादा उस मुस्लिम भाइयों से प्यार मिलता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कानून और न्याय को दबाया जा सके मेरा कहना है कि नागरिकता संशोधन बिल का विरोध करने वाले किसी जाति धर्म के हो और देश के गद्दार हैं ।उन्हें इस देश में रहने का अधिकार नहीं है जिससे करोड़ों की  संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है मैं और इस देश का सच्चा नागरिक कोई भी स्वीकार करने को तैयार नहीं होगा।जिस तरह से नुकसान पहुंचा रहे है।

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