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होलिका दहन मुर्हूत 9 मार्च रंगवाली होली 10 मार्च

होली का त्योहार भी बुराई पर अच्छाई के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन हिरण्यकश्यप की बहन होलिका जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था वह भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्वाद को लेकर अग्नि में बैठ गई थी लेकिन प्रह्वाद को कुछ भी नही हुआ और स्वंय होलिका ही उस अग्नि में भस्म हो गई होलिका दहन के अगले दिन रंग खेले जाते हैं। जिसे रंगावली या घुलंडी के नाम से भी जाना जाता है। भद्रा रहित प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि, होलिका दहन के लिये उत्तम मानी जाती है। परन्तु भद्रा मुख में होलिका दहन कदाचित नहीं करना चाहिये। पूर्णिमा तिथि 9 मार्च को प्रातः 03ः03 से प्रारम्भ होकर 9 मार्च को रात्रि 11ः17 तक रहेगी। भद्रा 9 मार्च को दिन 12रू19  तक रहेगी। 9 मार्च को होली दहन का मुर्हूत सायंकाल 06ः22 से रात्रि 08ः49 तक अमृत बेला में करना उचित है। रंग वाली होली 10 मार्च को खेली जायेगी। 


होलिका दहन पूजा विधि

होलिका दहन के पहले विधि पूर्वक डंडी देवी का पूजन किया जाता है। गुलाल , अबीर , फूल, नािरयल, मिष्ठान , कच्चा सूत  से होलिका का पूजन किया जाता है। होलिका पूजन के उपरान्त होलिका दहन किया जाता है। नये अनाज की बलियां और उपले होली में चढ़ाये जाते है और होलिका दहन के बाद उसमें  भूना गन्ना खाया  जाता है। होलिका दहन के समय गेहूँ और जौ की बालियाँ सेकी जाती हैं और उनके ‘होले’ प्रसाद के रूप में खाए जाते हैं।  दहन की लकड़ी के टुकड़े को कुछ लोग घर पर भी ले जाते है। होलिका दहन के बाद उसकी राख का तिलक करना और शरीर पर लगाना भी शुभ माना जाता है।    ऐसी मान्यता है कि वर्ष भर स्वस्थ रहने हेतु शरीर पर पीली सरसों को पीसकर सरसों के तेल से उबटने बनाकर पूरे शरीर में लगाकर उस उबटन को उतारकर गाय के गोबर के साथ होलिका में दहन करने से स्वास्थ्य लाभ होता है

होलिका के धुएं से भविष्यकथन

यदि होली में पूर्व की हवा चले तो इसे अच्छा माना जाता है और राज्य में खुशहाली और सुख आता है। दक्षिण की हवा चले तो इसे अच्छा नहीं माना जाता है। राज्य की सत्ता भंग होती है और फसल का नुकसान और मंहगाई होती है। पश्चिम की हवा चले तो सम्पत्ति बढ़ती है पर फसल खराब होती है। उत्तर की ओर हवा चले तो धन-धान्य बढ़ता है और अगर होली का धंुआ सीधा आकाश में जाता है तो ये बदलाव का संकेत है। राज्य के नेताओं की कुर्सी जायेगी। 

होलिका दहन में गोबर के उपले और गेहूँ की बाली और काले तिल अर्पित करें। होलिका दहन के समय किये जाने वाले कुछ उपाय-

1.  स्वास्थ्य लाभ हेतु होलिका दहन में काले तिल, हरी इलायची और कपूर को सिर से उतार कर होली के                 अग्नि में डालने से जल्द स्वास्थ्य लाभ होगा।
2. .धन लाभ के लिये चंदन की लकड़ी होली र्के अिग्न में डाले और धन के लिये प्रार्थना करें।
3. नौकरी, व्यापार हेतु एक मुठ्ठी पीली सरसों अग्नि में डालें और तीन बार परिक्रमा कर प्रार्थना करें।
4. विवाह हेतु- हवन सामग्री और घी होलिका दहन में डाले । 5. नजर और नकारात्मक ऊर्जा दूर करने हेतु              काली सरसों सिर से 7 बार उतारकर अग्नि में डालें।

 ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज  



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