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कोरोना वायरस ज्योतिष विश्लेषण 30 मार्च के बाद कोरोना प्रकोप कम होगा

विश्व में कोरोना वायरस महामारी का भय है हजारों मौतें इस संक्रमित रोग से हो चुकी हैं ज्योतिष  में राहु केतु को वायरस का नैसर्गिक कारक माना जाता है केतु असाध्य दीर्घकालिक बीमारियों या महामारी को दर्शाता है क्योंकि राहु कारण है और केतु परिणाम है। अभी राहु केतु अपनी  राशि मिथुन और धनु में अपने ही नक्षत्र आर्द्रा नक्षत्र और मूल नक्षत्र में गोचर कर रहे है आर्द्रा नमी का नक्षत्र है और बहुत शक्तिशाली हैं आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी रूद्र है काल पुरुष की कुंडली में मिथुन तीसरी राशि गले और छाती की राशि है राहु का गोचर इसी राशि में चल 
रहा है संवत 2076 ( वर्ष 2019-20) का राजा शनि है शनि जनता और दुखों का प्रमुख नैसर्गिक कारक है गुरु अर्थव्यवस्था और ऑक्सीजन का प्रमुख नैसर्गिक कारक है और अभी राहु केतु अक्ष मैं पीड़ित है 26 दिसंबर 2019 को सूर्य ग्रहण एवं 10 जनवरी 2020 को उपछाया चंद्र ग्रहण था  शनि 24.01.20 को धनु राशि से निकलकर


 अपनी राशि मकर राशि में गया इसके बाद यह वायरस फैला है गोचर में मंगल केतु गुरु की धनु राशि में युति  है  22 मार्च को मंगल धनु राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि मकर राशि शनि से युति करेगा  नव विक्रम संवत 25 मार्च बुधवार को हिंदू नववर्ष की शुरूआत हो रही है। इस साल 2077 में प्रमादी नाम का विक्रम संवत रहेगा।  
30 मार्च को  गुरु भी धनु राशि से निकलकर मकर राशि में आ जाने के बाद  कोरोना वायरस का प्रकोप कम होगा और फिर 14 अप्रैल को सूर्य मेष राशि अपनी उच्च राशि में आ जाएगा तो  सूर्य बलशाली होगा और राहु कमजोर पड़ जायेगा। तापमान में वृद्धि होगी  22 अप्रैल को राहु मृगशिरा नक्षत्र में गोचर करेगा तब उसकी  तीक्ष्णता कम होगी  और अप्रैल तक  भारतवासियों को कोरोना से बहुत राहत मिलेगी 4 मई को मंगल मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करेगा और 14 मई तक भारत में वायरस नियंत्रण में होगा सूर्य और मंगल स्वास्थ्य और मेडिसिन के प्रमुख नैसर्गिक कारक है अप्रैल माह में  उच्च के मंगल और सूर्य के कारण वैक्सीन खोज में सफलता मिलेगी  उपाय-महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें  

 - ज्योतिषाचार्य-एस.एस.नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ

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