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मंडियों में पड़ा ताला फिर भी धर्मकाटा संचालित, 2.80 करोड का भुगतान

हमीरपुर, महेश अवस्थी । बुन्देलखण्ड पैकेज में बनी विशिष्ट मंडिया व 133 ग्रामीण अवस्थापना केन्द्र का निर्माण संचालन न होने से यहंा अब बबूल के जंगल तैयार हो गये है। मंडी गेट पर ताला लगा है। मगर ताज्जुब की बात है कि इसके अंदर लगा धर्मकाटा कागजो में चल रहा है। काम भले कुछ न होता हो लेकिन संचालन और नियुक्त कर्मचारियों के वेतन पर करोडो रूपया खर्चा हो रहा है। जनसूचना अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी के जवाब में यह हकीकत सामने आयी। स्थापना से लेकर अब तक तीन साल में धर्मकाटा संचालन करने वाली कंपनी को 2.80 करोड का भुगतान किया जा चुका है। प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नही है। चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर में एक एक विशिष्ट मंडी और उपमंडियों की स्थापना मंे 604.67 करोड रूपये खर्च किये गये है। इसका निर्माण राज्य कृषि उत्पादन मंडी समिति ने विभिन्न
कार्यदायी संस्थाओ से काम कराया मंडी भवन विभाग को हस्तान्तरित कर दिये गये लेकिन मंडी का संचालन आज तक शुरू नही हुआ। आरटीआई में मिली जानकारी के मुताबिक इन मंडियों में धर्मकाटा संचालको के नियुक्त होने की जानकारी दी गयी। मंडी समिति के सहायक अभियन्ता आलोक निधि गोयल, के मुताबिक धर्मकाटा का संचालन मेसर्स लियोट्रानिक स्केल प्राइवेट लिमिटेड 47 हाइड बाजार अमृतसर पंजाब प्रान्त से कराया जा रहा है। इस कंपनी को वर्ष 2016-17, 17-18, 18-19 मंे 2 करोड 80 लाख 81 हजार रूपया का भुगतान किया गया। हमीरपुर जिले में बनायी गयी मंडी और उपमंडियों में सिर्फ तीन में गेंहू खरीद का काम होता है। बांकी सभी मंडिया वीरान पडी है। इनकी सुरक्षा में पीआरडी के जवान भी लगाये गये है। मगर धर्मकाटा में लगे कर्मचारियों को मुफ्त का मानदेय मिल रहा है क्योकि धर्मकाटा का संचालन सिर्फ कागजो में है। अपर जिलाधिकारी विनय प्रकाश श्रीवास्तव का कहना है कि नयी मंडियों में धर्मकाटा संचालन की जिम्मेदारी शासन स्तर से दी गयी है। मंडी सचिवो से इस बारे में जानकारी की जायेगी। इसके बाद आवश्यक कार्यवाही की जायेगी। 


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