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चैत्र नवरात्र 25 मार्च से 2 अप्रैल

नवरात्री में मां के नौ रूपों का पूजन किया जाता है। चैत्र नवरात्र में ग्रीष्म ऋतु के आगमन की सूचना देता है। शक्ति की उपासना चैत्र मास के प्रतिपदा से नवमी तक की जाती है। इस वर्ष चैत्र नवरात्र का प्रारम्भ 25 मार्च से है और नवमी 2 अप्रैल को होगी। इस वर्ष 9 दिन की नवरात्र है। नवरात्र में घट स्थापना , जौ बोने, दुर्गा सप्तशती का पाठ , हवन व कन्या पूजन से माँ दुर्गा प्रसन्न होती है।   चैत्र नवरात्र मंे दुर्गा पूजन हेतु इस वर्ष घट स्थापना महुर्त बुधवार 25 मार्च को प्रातः 06ः08 से प्रातः 10ः08 करना शुभ चैघड़िया में प्रातः 10रू40 से दिन 12रू12 तक श्रेष्ठ  है  । नवरात्र में प्रथम माँ शैलपुत्री द्धितीय माँ ब्रहाचारिणी, तृतीय माँ  चंद्रघण्टा,  चर्तुथ माँ  कुष्मांडा, पंचमी माँ स्कन्द माता, षष्ठी माँ कात्यानी देवी, सप्तमी माँ कालरात्री, माँ  महागौरी नवमी माँ सिद्धीदात्री की उपासना करने का विधान है।
 नवरात्र में नवार्णमंत्र ‘‘ ऊँ एंे ह्नी ं क्ली ं  चामुण्डाये विच्चे ’’ की साधना और दुर्गा सप्तशती का पाठ बहुत फलदायी होता है। नवरात्र में देवी माँ को नौ दिनों में अलग-अलग नैवेद्य चढ़ाने से निम्न मनोकामना की पूर्ति होती है। प्रथम- गो घृत- आरोग्य की प्राप्ति , द्धितीय- शक्कर - दीघार्यु की प्राप्ति, तृतीय- दूध- दुखों की निवृत्ति, चतुर्थ- मालपूआ- निर्णय शक्ति का विकास ,पंचम- केले- बुद्धि का विकास , षष्ठी- मधु-आकर्षण व सुन्दरता, सप्तमी- गुड़- शोकमुक्ति और विपत्तियों से रक्षा, अष्ठमी- नारियल- हर प्रकार की पीड़ा का शमन, नवमी- धान- लोक परलोक का सुख, दशमी- काले तिल- भय से मुक्ति प्रथम नवरात्र में माॅ शैलपुत्री, द्वितीय नवरात्र में माँ ब्रहाचारिणी, तृतीय नवरात्र में माँ चन्द्रघण्टा, चतुर्थ नवरात्र में कूष्माण्डा, पंचम नवरात्र में माँ स्कन्दमाता, षष्ठ नवरात्र में माँ कात्यायनी, सप्तम नवरात्र में माँ कालरात्री, अष्टम नवरात्र में माँ महागौरी, नवम् नवरात्र में माँ सिद्विदात्री के पूजन का विधान है। दुर्गा देवी के तीन रूप सरस्वती , लक्ष्मी व काली क्रमशः सत, रज और तम गुणों के प्रतीक है 

-ज्योतिषाचार्य एस. एस. नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र , अलीगंज , लखनऊ

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