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जिले के 2343 स्थानों पर हुआ होलिका दहन, फगुई आज

इस बार की फगुई में काफी कुछ है रेडीमेड

फतेहपुर, शमशाद खान । जनपद में होलिकोत्सव का समर आज होली दहन के साथ प्रारम्भ हो गया। जनपद में डेढ़ हजार से अधिक स्थानों पर फाग मल्लार की गूंजो के बीच हुए होलिका दहन के साथ शुरू हो गया। होली महापर्व का होलिका दहन से ही मूल जुड़ाव है और आज शाम जैसे ही मंत्रोच्चारण के बीच होलिका में आग प्रवाहित की गयी, लोगों ने सुहावने स्वरों के साथ इस महापर्व का इस्तकबाल किया। चारो तरफ कल से होने वाली फगुई की तैयारियां प्रारम्भ हैं और इसके लिए पूरी तैयारी लोगों ने कर ली है। वहीं जिले के अनेक स्थानों पर जलने वाली होली में अलग-अलग समय देखने को मिला। किसी जगह रात आठ बजे होलिका दहन किया गया तो कहीं-कहीं पर बारह बजे के बाद होली जलायी गयी। होली त्योहार मनाने के लिए उल्लास व मस्ती के बीच बाजारों में देर रात तक खरीदारी चलती रही और बच्चे अबीर व गुलाल के साथ टोपी व पसंदीदा पिचकारी खरीदते रहे। इस बार गजब की महंगाई से गुजिया का स्वाद कुछ फीका जरूर रहा। पिछले साल के मुकाबले चीनी और खोया ड्योढ़ी कीमत पर बिका। गुझिये का स्वाद बढ़ाने वाले मेवों की कीमत भी बीस से तीस फीसदी
होलिका दहन का दृश्य एवं गन्ने की खरीददारी करते लोग।
तक बढ़ने से लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझा पड़ा। एक आंकलन के तहत निम्न श्रेणी परिवारों की भी होली इस बार सामान्य तौर पर पूर्व वर्षों के मुकाबले दो से ढाई हजार महंगी पड़ी। 
होलिका दहन होने की परम्परा के साथ आज रात्रि के पहले पहर जनपद में 2343 स्थानों पर होली जलाई गयी। इनमें शहर में तकरीबन 843 व समूचे जनपद में 1500 के करीब स्थानों पर होलिका दहन हुआ। इसके पूर्व लगभग पखवारे से युवा वर्ग और किशोर होलिका को आकार देने में लगे रहे तथा बाजारों में चहलकदमी रही। देर रात तक महिलायें, बच्चे व पुरूषों के साथ जाकर मनचाही सामग्री की खरीददारी की। गुझिया के साथ नमकीन का मजा लेने के लिए नमकीन के पैकेटों की खासी बिक्री रही। यही नहीं मिष्ठान विके्रताओं ने रेडीमेड गुझिया भी तैयार की थी। जिनकी बिक्री देर रात तक होती रही। रंग बिरंगी पतंगियों की पैकिंग में गुझिया खरीदारों को आकर्षित करती रही। होलिका दहन के पूर्व तक बाजार में गन्ना, गेहूं की बाली व होला (कच्चा चना) की सजी विभिन्न दुकानों से खूब बिक्री हुई खरीदारी के लिए लोगो की भीड़ जमा रही। बताते है कि गन्ना, गेहॅू की बाली व होला को आग में भूनने का विशेष महत्व है। इस परम्परा के तहत ही बाजार गन्ना, गेहूं की बाली व कच्चे चने से गुलजार रहे। फगुनी बयार की धूम शुरू हो गयी है। होलिका दहन के साथ ही फाग मल्लार के लिए गांव-गांव में टोलियां बनाकर होली खेलने का दौर कल (आज) सुबह से शुरू हो जायेगा। उधर पौराणिक मान्यताओं के अनुसार होलिका में इलायची एवं कपूर डालने का भी महत्व है। बताते हैं कि होलिका में कपूर व इलायची की आहुतियाॅ देने से चेचक रोग का प्रकोप नही होता है।

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