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वर्ष में 165 दिन पढ़ाई, अंधकार में बच्चों का भविष्य

वर्ष भर की मोटी फीस ऐंठने वाले स्कूल मालिक मौज में अभिभावको की कट रही जेब
स्कूल तंत्र के आगे अभिभावक खुद को ठगा हुआ कर रहे महसूस
200 दिन के मानक के भले ही हो दावे लेकिन शिक्षा सत्र छह माह भी नही

फतेहपुर, शमशाद खान । बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलाना हर अभिभावक का सपना होता है। बच्चे अच्छी शिक्षा हासिल कर अपने पैरों पर खड़े होने के साथ ही समाज एव राष्ट्र निर्माण में भागेदारी निभाते है। लेकिन शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाली जगह अर्थात विद्यालयो में शिक्षण कार्यो से कही ज्यादा छुट्टी होने से अभिभावकों का सपना उनके अरमानों के साथ ही टूटता जा रहा है। शैक्षिक सत्र 2019 व 2020 की बात करे जनपद में यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई बोर्ड समेत अन्य बोर्डों के सैकड़ो विद्यालय संचालित है। मौजूदा शिक्षा सत्र में यदि कक्षाओं की बात की जाय तो अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों के साथ साथ प्रदेश सरकार से मान्यता वाले स्कूलों का शिक्षा सत्र एक अप्रैल से प्रारम्भ होता है। जो कि मई माह तक चलता है। मई व जून माह में लगभग 40-45 दिन ग्रीष्म कालीन अवकाश के बाद विद्यालय एक जुलाई से पुनः संचालित किये जाते है। वर्ष में
रविवार, महापुरूषों की जयन्ती पुण्यतिथि समेत तीज त्योहारों की छुट्टियां यदि जोड़ ली जाय तो लगभग साढ़े तीन माह का अवकाश होता है। जिसमे ग्रीष्म कालीन व शीतकालीन की छुट्टियां अलग से होती है। मौजूदा व्यवस्था में अभिभावक ही पीस रहा है। अच्छी शिक्षा के नाम पर विद्यालयो की ओर से वसूली जाने वाली मोटी फीस है। जबकि परिवहन व्यवस्था के लिये अलग से शुल्क लिया जाता है। समय समय पर बरसात, शीतलहर व भीषण गर्मियों के अलावा भी सरकारी निर्देशों पर स्कूलों को असमय ही बन्द करवा दिया जाता है। बार बार स्कूलों में छुट्टियां होने से जहाँ छात्र छात्राओं की शैक्षिक निरन्तरता बाधित होती है। वही स्कूलों द्वारा बन्द अवधि में बराबर फीस वसूली जाती है। जोकि अभिभावकों की जेब पर डाका डालना जैसा है। यदि वार्षिक छुट्टियों ग्रीष्म, शीतकालीन एवं बरसात के अलावा परीक्षा, टेस्ट, अभिभवक शिक्षक मीटिंग आदि को जोड़ ले तो वर्तमान में शैक्षिक सत्र वर्ष भर में मात्र 165 से 180 दिन से अधिक का नही है। शिक्षा विभाग एव स्कूल प्रबन्धतंत्र भले ही सत्र को 180 दिन से 200 दिन के मानक का हवाला दे रहा हो लेकिन बीच बीच मे सरकारी निर्देश पर कभी कक्षा एक से पांच तक कभी कक्षा आठ के अलावा अभी विद्यालयो में छुट्टी के लिये निर्देश जारी किए गये हैं। ऐसे में पढ़ाई की अवधि लगभग 165 दिन के आस पास ही रही। लगतार छुट्टियों के कारण बच्चों की पढ़ाई की निरन्तरता जहाँ बाधित होती है वहीं घरो पर शिक्षा का वह वातावरण भी नहीं बन पाता जो विद्यालयों की कक्षाओं में मिलता है। इन सब के बीच स्कूल प्रशासन द्वारा अभिभावको से पूरे सत्र अवधि की फीस भी वसूल की जाती है। बच्चों की शिक्षा में छुट्टियों की बाधाओं के साथ फीस के बोझ से आम अभिभवक अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहा है।

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