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जल संरक्षण की परंपरागत विधि अनुकरणीय: विवेक पाल

केंद्रीय भूजल आयोग के निदेशक ने किया जखनी गांव का भ्रमण 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । जखनी के किसानो ने सामुदायिक आधार पर बगैर सरकार की सहायता के जिस तरीके से परंपरागत विधि को अपनाकर जल संरक्षण का कार्य किया है, वह अनुकरणीय है। यह विचार विवेक पाल निदेशक केंद्रीय भूजल आयोग जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार दिल्ली ने जखनी गांव का भ्रमण के दौरान किसानों को संबोधित करते हुए कही। 
जखनी गांव का भ्रमण करते केंद्रीय भूजल आयोग के निदेशक विवेक पाल व अन्य 
उन्होंने कहा कि भू जल संरक्षण बगैर समाज के सहयोग के संभव नहीं है। जखनी के किसानों नौजवानों ने भू जल संरक्षण के लिए अपने खेत पर मेड़, मेड पर पेड़ का जो मंत्र समाज में दिया है, यही जल संरक्षण का असली उपाय है। जीएल बंसल निर्देशक केंद्रीय जल आयोग दिल्ली आगरा जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार ने कहा कि भारत सरकार नीति आयोग जखनी गांव के किसानों के भू जल संरक्षण के प्रयोग को बहुत गंभीरता से देख रहा है। काम भले ही आज छोटा दिख रहा हो लेकिन भविष्य में जल संरक्षण की दिशा में जख्मी का प्रयास माडल देश दुनिया के लिए जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा। क्योंकि जखनी गांव के किसानों ने समुदाय के आधार पर जल संरक्षण की दिशा में अपनी मेहनत से समाज व सरकार को दिशा दी है। जखनी के परंपरागत तालाबों, कुओं को देखा। नालों को देखा सभी में साफ हैं। पानी भी है। जखनी के किसानों नौजवानों ग्राम वासियों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता है, उत्साह है अपनापन है। यही सफलता का राज है जिसने जखनी को जल ग्राम बनाया। इस अवसर पर मुजफ्फर अहमद अधीक्षण अभियंता राष्ट्रीय जल आयोग ने कहा कि जखनी के किसानों से उन सब को सीखनी चाहिए जहां जल संकट है। उपनिदेशक गौरव अग्रवाल ने कहा कि बुंदेलखंड में समुदाय के आधार पर इस गांव में किसानों ने अद्भुत काम किया। अधीक्षण अभियंता राघवेंद्र गुप्ता केन बेतवा लिंक परियोजना ने कहा कि हम जख्मी के किसानों नौजवानों ग्रामवासियों के आभारी हैं जिन्होंने समाज को हमारे मंत्रालय को परंपरागत तरीके से जल संरक्षण की दिशा में बगैर किसी सरकारी मदद के हजारों वर्ष पुरानी जल संरक्षण विधि को अपनाया। मंत्रालय और हम इस विधि अन्य जिलों में भी लागू करेंगे।

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