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Saturday, February 15, 2020

सरकारी इलाज और सुविधाओं पर भरोसा रख याकूब ने दी कुष्ठ को मात

67 कुष्ठ रोगियों का चल रहा मुफ्त इलाज, दी जा रही विशेष सुविधाएं 
सफेद दाग जो सुन्न नहीं होता, कुष्ठ रोग नहीं है: डा. एसपी द्विवेदी     

बांदा, कृपाशंकर दुबे । शहर के जरैली कोठी निवासी 45 वर्षीय मजदूर याकूब को 10 वर्ष पहले बाएं हाथ में कुष्ठ रोग हुआ था। याकूब अपना सारा काम बाएँ हाथ से ही करते थे। इस रोग ने याकूब को न सिर्फ दिव्यांग, बल्कि जीवन भर के लिए बेरोजगार भी बना दिया। जो बायाँ हाथ याकूब की ताकत था, कुष्ठ के कारण दिव्यांगता का शिकार हो गया। याकूब बताते हैं कुष्ठ रोग की गिरफ्त में जब मैं आया तो  मेरे बाएं हाथ की ऊंगली सुन्न हो जाती थी। पहले तो निजी क्लीनिक वाले डाक्टरों से दवाई ली पर आराम नहीं मिला। फिर सरकारी अस्पताल में दिखाया तो वहां पूरा इलाज हुआ। कुष्ठ विभाग की टीम के शालीन व्यवहार से इस लड़ाई को जीतने की ताकत मिली। बीमारी से लड़ने में मेरे परिवार ने भी हमेशा मेरा साथ दिया। कुष्ठ जनित विकलांगता के तहत मिलने वाली पेंशन के कारण ही वह आज अपने परिवार का पालन-पोषण कर पा रहा हूं।
कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम में दवा देते स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी
कुष्ठ रोग के लिए सरकारी इलाज और सुविधाओं से बेहतर और कुछ नहीं है। यह केवल याकूब ही नहीं, बल्कि ऐसे कई लोगों का कहना है जिन्होंने कुष्ठ से लड़ाई में सरकारी इलाज और सुविधाओं पर भरोसा किया और इसमें जीत भी हासिल की। जिला कुष्ठ अधिकारी डा. एसपी द्विवेदी बताते हैं कि कुष्ठ कार्यक्रम के तहत जनपद में रोगियों को विशेष सेवाएं दी जा रही हैं। वर्तमान में जनपद में 67 कुष्ठ रोगी हैं जिनका एमडीटी दवा से मुफ्त इलाज किया जा रहा है। वर्ष 2019-20 में अब तक कुष्ठ के 51 रोगी रोगमुक्त हुए जबकि 47 नए रोगी भी खोजे गए हैं। पूरे जनपद में अब एक भी बच्चा कुष्ठ रोग से पीड़ित नहीं है। कुष्ठ जनित विकलांगता के लिए सरकार द्वारा प्रमाण पत्र भी दिए जाते हैं, इस वर्ष 192 कुष्ठ प्रभावित विकलांगों को प्रमाण पत्र जारी किये गए हैं। इसके साथ ही पात्र पाए जाने पर दिव्यांग कल्याण विभाग की ओर से कुष्ठ प्रभावित विकलांगों को पेंशन दी जाती है। इसके तहत वर्तमान में जनपद के 110 कुष्ठ प्रभावित विकलांगों को 2500 रुपये प्रति माह की दर से पेंशन भी दी जा रही है।
डॉ. द्विवेदी बताते हैं कि कुष्ठ रोग एक बहुत ही कम संक्रामक रोग है जो वैक्टीरिया के कारण होता है। हमारे समाज में अभी भी कुष्ठ रोग को लेकर कई भ्रांतियां फैली हुई हैं, इसलिए इसके प्रति लोगों में जागरुकता फैलाना जरूरी है। यदि कुष्ठ रोग की जांच शुरुआत में ही करा ली जाए और इसका पूरा उपचार कराया जाए तो यह पूर्ण रूप से ठीक हो सकता है। कुष्ठ जनित विकलांगता से भी बचा जा सकता है। हालांकि दवा खाने के कुछ मामूली दुष्प्रभाव जैसे त्वचा का सांवलापन हो सकता है पर इनसे घबराने नहीं चाहिए। कार्यक्रम के तहत कुष्ठ रोगियों को सेल्फ-केयर किट दी जाती है। इससे  वे अपने घावों का ख्याल रख सकें। इसके अलावा कुष्ठ प्रभावित पैरों को घाव से बचाने के खास चप्पल भी दिए जाते हैं।      

प्रमाण पत्र और पेंशन के लिए यहां करें आवेदन 

बांदा। कुष्ठ के कारण विकलांग हुए व्यक्ति अपना प्रमाण पत्र बनवाने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के कमरा न.14 में संपर्क कर सकते हैं। पेंशन के लिए आवेदन करने के लिए विकास भवन स्थित जिला दिव्यांग कल्याण विभाग से संपर्क कर सकते हैं।     

कुष्ठ के लक्षण

  1. शरीर पर सुन्न दाग 
  2. हथेली या पैर के तलवे में सुन्नता 
  3. नसों में सूजन, मोटापा या दर्द 
  4. हाथ, पैर, आंख में कमजोरी, विकृति 
  5. घाव जिसमें दर्द न हो
  6. चेहरे, शरीर या कान पर गांठें, छाले, घाव 

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