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डा. भटनागर ने वैज्ञानिक शोध की धरी आधारशिला - डा. द्विवेदी

हमीरपुर, महेश अवस्थी । जिला विज्ञान क्लब के जिला समन्वयक डा0 जी0 के0 द्विवेदी ने कहा कि आज भारत जो उच्च स्तरीय शोध कार्य तथा विज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र मे नई-नई उपलब्धियां प्राप्त कर रहा है उसका श्रेय पद्मभूषण पुरस्कार प्राप्त महान भारतीय वैज्ञानिक डाॅ0 शान्ति स्वरूप भटनागर  को जाता है। सन 1915 मे दयाल सिंह हाईस्कूल, लाहौर मे प्रधानाध्यापक की पुत्री लाजवन्ती के साथ उनका विवाह हुआ। वे डा. भटनागर के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे उन्होने कहा कि रसायन विज्ञान मे एम.एससी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होने कुछ समय के लिये मिशन कालेज एवं दयाल सिेह कालेज मे अध्यापन कार्य किया। 1921 मे उन्होने लन्दन विश्वविद्यालय से डी.एस.सी. की उपाधि प्राप्त की। इन्ही दिनो डा0 भटनागर हेवर, आइन्सटीन
डा. भटनागर के चित्र पर माल्यार्पण करते डा. जीके द्विवेदी व अन्य
और डोनन जैसे प्रसिद्ध वैज्ञानिकों के सम्पर्क मे आये। तीन वर्ष तक काशी विश्वविद्यालय मे कार्य करने के पश्चात डा0 भटनागर लाहौर मे पंजाब विश्वविद्यालय के भौतिकी एवं रसायन विज्ञान विभाग के निदेशक 1924 1940 तक बने रहे। अंग्रेजी सरकार ने उनकी योग्यताओं का सम्मान करते हुये उन्हे 1941 मे सर की उपाधि से विभूषित किया। उन्होने बताया कि डा0 भटनागर ने मोम को गंधहीन बनाने, मिट्टी के तेल को शुद्ध करने, पेट्रोलियम उद्योग से निकलने वाले व्यर्थ पदार्थों का उपयोग एवं रेत से धातुओं को उत्पन्न करने की दिशा मे शोध कार्य किया। विदेश प्रवास के दौरान उन्होने इमल्शन, कोलाइड्स और औद्योगिक रसायन विज्ञान पर उच्च स्तरीय शोध कार्य किया। सरकार ने डा.भटनागर को ‘बोर्ड आफ इण्डस्ट्रियल एण्ड सांइटिफिक रिसर्च’ का निदेशक बनाया, जो अब ‘वैज्ञानिक एवं औद्योगिकी अनुसंधान परिषद’ के नाम से जानी जाती है। 1943 मे वह राॅयल सोसायटी के सदस्य चुने गये। डा. भटनागर ने देश मे तेल शोधन प्रयोगशालाओं का शुभारम्भ करवाया। उनके समय मे ही टाइटेनियम और जरकोनियम के उत्पाद के कारखाने बने एवं परमाणु खनिजों व खनिज तेल पर कार्य प्रारम्भ किया गया। उन्होने न फटने वाले कन्टेनर एवं व्यर्थ चीजों से प्लास्टिक भी बनाया। उन्होने अपने पेटेन्टो द्वारा जो धन उन्हे मिलता था, उसका भी काफी भाग पंजाब विश्वविद्यालय को दे दिया करते थे। ताकि वहां उच्च स्तरीय शोध कार्य हो सके। उनका मानना था कि विज्ञान और तकनीकी पैसा कमाने के लिये नहीं होते। चमत्कारों की वैज्ञानिक व्याख्या के विशेषज्ञ रमाकान्त, सियादीप प्रशिक्षण शिक्षा संस्थान के प्रबन्धक प्रमोद कुमार शुक्ल, ओ0पी0 पटेल, विज्ञान क्लब के कार्यकर्ता अर्पित त्रिपाठी, ज्योति शुक्ला उपस्थित रहे।

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