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पशुपालन के जरिए किसानों की आय हो सकती है दोगुनी: कुलपति

वैज्ञानिकों ने भविष्य की रणनीतियों पर प्रकाश डाला 
प्रशिक्षण के माध्यम से समस्याओं के समाधान का सुझाव 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में दो दिवसीय तकनीकी दक्षता प्रशिक्षण बुधवार से शुरू हो गया। दक्षता प्रशिक्षण में चर्चा के दौरान वैज्ञानिकों ने भविष्य की रणनीतियों पर भी प्रकाश डाला। कहा कि इस प्रकार के तकनीकी प्रशिक्षणों के जरिए ज्ञान में बृद्धि कर सकते है। उन्होने प्रशिक्षण में अधिक से अधिक चर्चा के माध्यम से समस्याओं के समाधान का सुझाव दिया।
प्रशिक्षण के दौरान संबोधित करते कुलपति यूएस गौतम 
कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत बुंदेलखंड के बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, झांसी एवं ललितपुर के वैज्ञानिकों के लिये दो दिवसीय तकनीकी दक्षता प्रशिक्षण का उद्घाटन विश्वविद्यालय कुलपति डा.यूएस गौतम ने ने किया। कहा कि वैज्ञानिकों को बुन्देलखण्ड की कृषि परिस्थितियों के लिये उपयोगी तकनीकों को कृषकों तक सुगम तरीके से पहुचानें का आहवान किया और कहा कि इन्ही तकनीकों के प्रयोग से बुन्देलखण्ड के कृषकों की आय दोगुनी हो सकेगी। उन्होंने अन्ना प्रथा, जलवायु परिवर्तन, बीज उत्पादन, जैविक कृषि व विविधीकरण की तरफ वैज्ञानिकों का ध्यान आकृष्ट किया। बुन्देलखण्ड की कृषि जलवायु हेतु बकरी पालन, भेड़ पालन, मत्स्य पालन, सूकर पालन आदि की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है जिसके द्वारा कृषकों की आय आसानी से दोगुनी किया जा सकता है। चर्चा के दौरान उन्होने उपस्थित वैज्ञानिकों से भविष्य की रणनीतियों पर भी प्रकाश डाला। संयुक्त निदेशक कृषि डा.विवेक सिंह ने विभाग द्वारा चलाई जा रही गतिविधियों की जानकारी देते हुए ध्यान आकर्षित किया किया। इस मौके पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.ईश्वर नारायण सिंह, पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नॉलाजी के विशेषज्ञ हर्षद मंडगे, प्रसार के विशेषज्ञ डा.धीरज मिश्रा, पशुपालन विशेषज्ञ डा.मयंक दुबे, एकीकृत फसल प्रणाली माडल की तकनीकी विशेषज्ञ डा.अनिकेत काल्हापुरे, निदेशक प्रसार डा.एनके बाजपेई, सह निदेशक प्रसार डा. नरेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे। संचालन डा.एसबी सिंह ने किया। 

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