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मौरम माफियाओ ने दी महिला किसान को परिजनों की हत्या कराने की धमकी

डेढ़ दशक से माफियाओं की प्रताड़ना झेल रही महिला किसान
एसपी से लगायी माफियाओं से जानमाल की सुरक्षा की गुहार

उरई (जालौन), अजय मिश्रा । बेतवा नदी के किनारे बसे गांवों में अवैध मौरम खनन करने में लिप्त माफियाओं की कू्ररता से डेढ़ दशक से प्रताड़ना की शिकार महिला किसान ने बुधवार को पुलिस अधीक्षक से भेंट कर प्रार्थना पत्र सौंपते हुये मौरम माफियाओं द्वारा बार-बार दी रही परिजनों की हत्या कराने की धमकी के मामले में सुरक्षा की गुहार लगायी। महिला का कहना था कि माफियाओं ने सोमवार को उसके साथ मारपीट की थी जिसकी शिकायत डकोर थाना पुलिस से की थी लेकिन पुलिस मामले में लीपापोती करने में जुट गयी है।
एसपी को प्रार्थना पत्र देने जाता दंपत्ति।
बकौल शांती देवी पत्नी स्वामीदीन निवासी ग्राम बंधौली ने पुलिस अधीक्षक को दिये गये प्रार्थना पत्र में बताया कि उसे पिछले 15 वर्षों से मौरम माफिया लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं। उसके खेतों से जबरन मौरम भरे वाहनों की निकासी की जाती है जब मैं इसका विरोध करती हूं तो मौरम माफिया मेरे साथ गाली गलौज व मारपीट करने से नहीं चूकते हैं। शांती देवी ने यह भी बताया कि 18 फरवरी की शाम गांव के ही जाहिर सिंह, भगवान सिंह पुत्रगण कृपाल यादव जो अवैध तरीके से मौरम का खनन करते हैं ने मेरी व मेरे पति से मारपीट की जिसकी लिखित शिकायत मैंने डकेर थाने में दी लेकिन पुलिस ने आरोपियांे के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की। महिला ने बताया कि मारपीट के दौरान मेरे शरीर पर जो चोटें आयी थी उसका मैंने चिकित्सीय परीक्षण भी कराया। शांती देवी का कहना था कि अब आरोपी मुझे मेरे परिवारजनों की हत्या कराने की धमकियां दे रहे हैं। महिला ने एसपी से न्याय की गुहार लगाते हुये मारपीट करने वाले मौरम माफियाओं के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की है।

आधा दर्जन से अधिक गांवों में मौरम माफियाओं का आतंक
उरई। बेतवा पट्टी के किनारे के आधा दर्जन से अधिक गांवांे में अवैध मौरम खनन करने वाले माफियाओं का आतंक ग्रामीणों पर सिर चढ़कर बोल रहा है। ऐसे गांवों में बंधौली, खरका, गुढ़ा, सिमिरिया, टीकर, कुरौना, मुहाना व मकरेछा सहित कई ऐसे गांव हैं जहां शाम ढलते ही मौरम माफियाओं रात्रि के अंधेरे में अपने काले कारनामों को अंजाम देने में जुट जाते हैं। ऐसे गांवों में आये दिन अवैध मौरम माफियाओं के कारिंदों द्वारा कब किस ग्रामीण के साथ मारपीट देकर जानमाल की धमकियां देने लगे कुछ कहा नहीं जा सकता। चूंकि ऐसे मौरम माफियाओं की पुलिस से गहरी सांठगांठ रहती है जिससे पुलिस भी पीड़ित ग्रामीणों की शिकायत को रद्दी बनाकर फेंक देती है। सोचनीय विषय तो यह है कि अवैध मौरम माफियाओं की बादशाहत जनपद में कब तक कायम रहेगी यह तो समय ही बतायेगा।

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