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कल से शुरू होगा संचारी रोग नियंत्रण और दस्तक अभियान

स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर-घर जाकर लोगों को किया जाएगा जागरुक 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । मौसम के बदलने के साथ संचारी रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने संचारी रोगों के प्रति जनपद के लोगों को जागरुक करने की तैयारी कर ली है। 1 मार्च से जनपद में संचारी रोग नियंत्रण अभियान की शुरुआत की जाएगी। यह अभियान 31 मार्च तक चलेगा। इस बार अभियान में दस्तक अभियान को भी जोड़ा गया है जो कि 16 से 31 मार्च तक चलाया जाएगा। आशा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता इसमें अहम भूमिका निभाएंगी।
इसी क्रम में आज शुक्रवार को जिलाधिकारी सभागार में जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल की अध्यक्षता में बैठक की गई। जिसमें उन्होंने विभिन्न विभागों को समन्वय में काम कर अभियान को सफल बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान होने वाली साप्ताहिक बैठक में सही रिपोर्टिंग पर ध्यान दिया जाए और सभी रिपोर्ट उनके सामने प्रेषित की जाएं।
जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार ने बताया कि वर्ष 2020 में संचारी रोग नियंत्रण अभियान एवं दस्तक अभियान का यह प्रथम चरण है। अभियान के दौरान संचारी रोगों जैसे मलेरिया, फाइलेरिया, चिकनगुनिया और दिमागी बुखार के प्रति आम जनमानस को जागरुक किया जाएगा। अभियान में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, नगर विकास विभाग, पंचायती राज विभाग, ग्राम विकास विभाग, कृषि एवं सिंचाई विभाग, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग समेत दस विभाग मिलकर काम करेंगे। इसके लिए जिला तथा ब्लॉक स्तर पर समन्वय समितियों का गठन किया गया है। विभिन्न विभागों को इसके लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।

दस्तक अभियान के तहत आशाएं निभाएंगी अहम जिम्मेदारी  
बांदा। जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि प्रदेश सरकार ने इस बार सभी जनपदों में संचारी रोग नियंत्रण अभियान के साथ दस्तक अभियान के लिए भी विशेष निर्देश दिए हैं। दस्तक अभियान के तहत आशाएं घर-घर जाकर संचारी रोगों से बचाव तथा इनके उपचार के बारे में जानकारी देंगी, जागरुकता के लिए घरों के बाहर स्टीकर लगाएंगी, घरों के भीतर जाकर मच्छरों के पनपने की अनुकूल स्थितियों की जांच करेंगी, बुखार के रोगियों की लाइन लिस्ट व मलेरिया जांच हेतु उनकी स्लाइड बनाएंगी। इसके साथ ही आरडीटी किट से जांच करने का कार्य भी करेंगी। दस्तक अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य शिक्षा और जागरुकता फैलाने के साथ-साथ व्यवहार परिवर्तन करना है। 

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