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Wednesday, February 12, 2020

एहतियात से रोका जा सकता है एचआईवी वायरस का संक्रमण

बिजनौर (संजय सक्सेना) जिलाधिकारी रमाकांत पाण्डेय ने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि एचआईवी वाएरस के प्रति सचेत रहते हुए पूरी सर्तकता और सजगता के साथ कार्य करें और शासकीय तथा प्राईवेट चिकित्सालयों में किसी भी अवस्था में सीरीन्ज का दोबारा प्रयोग न करने के लिए सभी आवश्यक कार्यवाही अमल में लाएं। उन्होंने कहा कि एचआईवी वायरस फैलने के संक्रामित पुरूष अथवा महिला के अलावा अन्य कारण भी हैं, जिनके बारे में समुचित एहतियात रख कर एचआईवी वायरस के संक्रमण को रोका जा सकता है। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि ब्लड बैंक में रक्तदाताओं द्वारा दिए जाने वाले रक्त का पूरी सजगता के साथ परीक्षण कर प्रयोग के लिए उपलब्ध करायें तथा विदेश से आने वाले व्यक्तियों के एचआईवी जांच की व्यवस्था भी सुनिश्तिच करें। जिलाधिकारी श्री पाण्डेय आज शाम 4 बजे कलक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला के आयोजन के अवसर पर उपस्थित अधिकारियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों को सम्बोधित करते हुए अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। 
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि एचआईवी के विपरीत जब तक मानव का प्रतिरक्षक तन्त्र, एन्टी बाॅडीज उचित मात्रा  में उत्पन्न नहीं करता है, तब तक वायरस की सही स्थिति का आॅकलन मुश्किल है, जबकि शरीर में वायरस रहता है तथा वह अन्य व्यक्तियों को संक्रमित कर सकता है। एचआईवी से एड्स की अवस्था तक पहुचने में 5 से 10 साल का समय लगता है। जब एचआईवी वायरस हमारे शरीर में प्रवेश करता है तब प्रतिक्रिया स्वरूप हमारा शरीर एन्टीबाॅडीज बनाता है। एचआईवी जाॅच से पता चलता है कि एन्टीबाॅडीज हमारे खून में है या नही। आईसीटीसी में जाॅच गोपनीय होती है। एन्टीबाडीज बनने में लगभग 12 सप्ताह लगते है, इस समय को बिन्डो पीरियड कहा जाता है। यदि पहली बार में जाॅच का परिणाम निगेटिव आए तो जाॅच दोबारा से की जा सकती है क्यांकि हो सकता है पहली बार जाॅच कराते समय व्यक्ति विन्डो पीरियड में हो। एड्स एक लाइलाज बीमारी है परन्तु सही दवाओं के नियमित इस्तेमाल तथा उचित डाक्टरी सलाह तथा स्वयं के देखभाल से समय को बढ़ाया जा सकता है।   उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य विभाग के समस्त चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ को एचआईवी/एड्स के विषय में समय समय पर पूर्ण एवं सही जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि वे आमजन को इसके सम्बन्ध में जरूरी और महत्वपूर्ण मालूमात उपलब्ध करा सकें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों को बिना किसी भेदभाव के भर्ती से लेकर पूर्ण एवं समुचित उपचार प्रदान करना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है। उन्होंने जेल अधीक्षक को निर्देश दिए कि जिन कैदियों में एचआईवी वायरस पाॅसेटिव है, उन पर विशेष नज़र रखी जाए तथा उनका नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण कराते हुए समुचित उपचार की व्यवस्था की जाए। 
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी कामता प्रसाद सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. विजय कुमार यादव, उप मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एसके निगम, डा. शैलेश जैन, जिला मलेरिया अधिकारी ब्रजभूषण के अलावा अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद थे। 

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