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जननायक की मूर्ति हटाने वालों पर राष्ट्रदोह का मुकदमा दर्ज करने की उठी मांग

सामाजिक संगठनों ने राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर मामले से कराया अवगत 

फतेहपुर, शमशाद खान । ताम्बेश्वर चैराहे में स्थापित की गयी जननायक एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की मूर्ति का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। तीन दिन पूर्व अराजकतत्वों द्वारा प्रतिमा को चैराहे से हटा दिया गया था। इस मामले में शनिवार को सामाजिक संगठनों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर मूर्ति हटाने वालों पर राष्ट्रदोह का मुकदमा दर्ज करने की जहां मांग उठायी। वहीं पूरे मामले से भी अवगत कराते हुए मूर्ति को पुनः उसी स्थल पर प्रतिस्थापित कराये जाने की मांग की है। 
सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने राज्यपाल को भेजे गये ज्ञापन में बताया कि महान सपूत एवं महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर के प्रति आस्था एवं श्रद्धा रखने वाले लोग हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी हैं। बताया कि नगर पालिका बोर्ड द्वारा 2015 में कर्पूरी ठाकुर के नाम से चैराहा स्थापित करने हेतु प्रस्ताव नऊवाबाग चैराहे के लिए पारित किया था। फिर उसके उपरान्त परिवर्तन करके वर्ष 2016 में वीआईपी रोड डाक बंगला से आगे एवं ताम्बेश्वर मंदिर से लगभग पांच सौ
डीएम को ज्ञापन देने जाते सामाजिक संगठनों के लोग।
मीटर दूर स्थित चैराहे को चिन्हित कर उनकी प्रतिमा स्थापित किये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। जिस पर सविता सेवा समिति संगठन द्वारा इक्कीस जनवरी को प्रतिमा स्थापित की गयी थी। सम्बन्धित मूर्ति का अनावरण चैबीस जनवरी को होना था। लेकिन कुछ अराजकतत्वों द्वारा महज विधि विरूद्ध एवं संविधान विरूद्ध मांग प्रशासन के समक्ष रखकर अनावरण का कार्यक्रम रूकवा दिया गया। जबकि उन अराजकतत्वों की मांग न तो विधि सम्मत थी और न ही धर्मसम्मत थी। इसके बावजूद मूर्ति का अनावरण नही हो सका। मूर्ति लगी थी उसे बीस फरवरी की रात कुछ अराजकतत्वों द्वारा प्रशासन की मिलीभगत से गायब कराया गया। जो कि भारत के महान सपूत एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का ही नहीं बल्कि राष्ट्र का अपमान है। राज्यपाल से मांग की गयी कि कर्पूरी ठाकुर की मूर्ति का तत्काल पता लगाकर बरामद की जाये और ससम्मान उसी स्थल पर पूर्वत प्रतिस्थापित की जाये। समस्त बिन्दुओं की जांच कराकर उक्त अराजकतत्वों एवं इसमें शामिल प्रशासनिक अधिकारियों के विरूद्ध राष्ट्रदोह का मुकदमा कायम कराया जाये एवं दोषीजनों को दण्डित किया जाये। मूर्ति पुर्नस्थापित कराकर अविलम्ब अनावरण कराया जाये। यदि ऐसा न हुआ तो सामाजिक संगठनों के लोग वृहद आन्दोलन के लिए बाध्य हो जायेंगे। इस मौके पर बुद्धराज धाकड़ी, उदयभान सविता, राजकुमार मौर्य एडवोकेट, बृजेश कुमार, कमलेश योगी, आसिफ, पवन सिंह, संजय कुमार, राम किशोर, कालीचरन, रजोल सेन, जयनारायण, राम औतार, अमरनाथ कैथल, बृजेन्द्र यादव एडवोकेट, वजाहत हुसैन एडवोकेट, जय सिंह यादव एडवोकेट, जसवीर सिंह एडवोकेट, शंकरलाल, अरूण कुमार एडवोकेट, देवेन्द्र सिंह पटेल, मनोज कुमार सविता, राजेश कुमार मौर्य, राम किशोर प्रजापति आदि मौजूद रहे। 

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