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मेरा मकसद पूरा हो गया है, मैं जा रहा हूूॅ - सरदार अजीत

हमीरपुर, महेश अवस्थी । जरा याद करो कुर्बानी के तहत सरदार अजीत सिंह की जयन्ती पर कार्यशाला में प्राचार्य डा. भवानीदीन ने कहा कि अजीत सिंह भगत सिंह के चाचा थे। वे एक राजनीतिक विद्रोही थे। चार दशको तक देश की सेवा करते हुए कई देशो की यात्रा की। विदेशो में रहकर आजादी के लिए संघर्ष किया। उनका जन्म जालंधर के खतकर कला गांव में हुआ था। अजीत सिंह ने ईरान होते हुए तुर्की ,जर्मनी, ब्राजील व
इटली की यात्रा की। चालीस भाषाओं पर उनका अधिकार था। अंग्रेज सरकार ने उन्हे फांसी की सजा सुनायी। लाला लाजपत राय के साथ उन्हे देशनिकाला की भी सजा मिली थी। आजाद हिंद फौज की स्थापना अजीत ने की। देश की आजादी के बाद जब वह मात्र भूमि मे पहुंचे तो अजीत ने रेडियों में कहा कि मेरा मकसद पूरा हो गया है, मैं जा रहा हूूॅ। परिवार के लोग समझ नही पायंे। 15 अगस्त की सुबह 04 बजे जयहिंद बोलकर इस संसार को छोड गये। कार्यशाला में डा. श्यामनारायण आरती गुप्ता अखिलेश सोनी देवेन्द्र त्रिपाठी आलोक राज सुरेश सोनी, प्रदीप यादव, राकेश यादव, हिमांशु सिंह, प्रत्यूश त्रिपाठी ने भी विचार रखें। संचालन डा. रमाकान्त पाल कर रहे थे। 

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