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Saturday, February 1, 2020

सत्संग की निरंतर कामना करना चाहिए: पंकज महाराज

जय गुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था जनजागरण यात्रा ने सांड़ासानी में डाला पड़ाव 

कमासिन, कृपाशंकर दुबे । जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था मथुरा के अध्यक्ष पंकज जी महाराज ने सांड़ासानी गांव में सत्संग को संबोधित करते हुए कहा कि जन्म जन्मान्तर के पुण्य जब इकट्ठा होते हैं, तब सत्संग सुनने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि सत्संग की निरंतर कामना करना चाहिए। पंकज की अगुवाई में चली सत्संग की 40 दिवसीय बुन्देलखण्ड आध्यात्मिक वैचारिक जनजागरण यात्रा ने कमासिन विकास खण्ड के साड़ासानी गांव में पड़ाव डाला। सत्संग की महिमा का वर्णन करते हुये कहा कि सत्संग से विवेक जागृत होता है। भ्रम का निवारण होता है। सत्संग वह जगह है जहां प्रभु के नाम की महिमा का बखान होता है। प्रभु से मिलने का पे्रम, प्यार उत्पन्न किया जाता है। यहां किसी की निन्दा, आलोचना नहीं की जाती है।
उन्होंने लोगों को भगवान की भक्ति की पे्ररणा देते हुये कहा हम सबको मानव का शरीर एक ही मुख्य उद्देश्य के लिये मिला है। इस देवदुर्लभ शरीर द्वारा आत्मा को अपने अजर-अमर सत्तदेश पहुंचाना है। आत्मा सतनाम रूपी समुद्र की बूंद है। जहां पहुंच कर यह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जायेगी। इसका रास्ता सन्त महात्मा ही जानते हैं। उन्होंने कहा गुरु कोई वेशभूषा, वकतव्य देने य वाकपटुता का नाम नहीं बल्कि गुरु वह है जो आत्मा को अन्धकार से निकाल कर प्रकाष में खड़ा कर दें। जो धुरधाम से आने वाली देववाणी से जुड़े हों। महापुरुषों ने उनके सम्बन्ध में कहा गुरु सोई जो शब्द सनेही। शब्द बिना दूसर नहिं सेही। शब्द कमावे सो गुरु पूरा, उन चरनन की हो जा धूरा। यह आध्यात्मिक विज्ञान है जो भौतिक ज्ञान की चोटी से प्रारम्भ होता है। इस आध्यात्मिक विद्या को प्राप्त करने के लियेे सबसे पहले मानवतावादी बनें, मानव धर्म-कर्म का पालन करें। एक-दूसरे के काम आयें। चरित्र जैसे धन का संग्रह करें। बिना चरित्र के मनुष्य की कोई कीमत नहीं। पंकज महाराज ने बताया यह कलियुग है इसमें पहले के समय की साधना इसलिये नहीं हो सकती क्योंकि मनुष्य की आयु घट गई, शारीरिक शक्ति कम हो गई तथा प्राणों की स्थिति बदल गई। इसलिये आत्म कल्याण के लिये धुरधाम से अवतरित संतों ने शब्द (नाम) का रास्ता जारी किया। महाराज ने समाज में बढ़ती वर्तमान की अपराध, हिंसा व चरित्र पतन पर लोगों का ध्यान आकृष्ट करते हुये कहा आज यह सारी समस्यायें मांसाहार, शराब जैसे नषों के सेवन तथा चरित्र उत्थान की षिक्षा के अभाव के कारण हैं। समाज के सभी प्रबुद्ध लोगों को इस ओर ध्यान देकर वर्तमान पीढ़ी के नवयुवकों को शराब जैसे नशे से दूर करने और उन्हें अच्छे समाज के निर्माण में भागीदार बनाने की आवष्यकता है। इस अवसर पर भूप सिंह, सुघर सिंह, ललक सिंह, मुन्नूलाल, षिरोमणि यादव, इन्द्रपाल सिंह पटेल, पवन सिंह, सूर्यबली सिंह जिलाध्यक्ष प्रतापगढ़ आदि उपस्थित रहें और आयोजन में सहयोग किया। पुलिस प्रषासन ने शांति, सुरक्षा की व्यवस्था किया। सत्संग के बाद धर्म यात्रा अगले पड़ाव मऊ इंगुआ विकास खंड कमासिन के लिये प्रस्थान कर गई। 

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