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धनुष टूटते ही बरस पड़े फूल

रामलीला में धनुष यज्ञ देखकर भाव विभेर हुए श्रद्धालु
धनुष टूटते ही जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजा पंडाल 

बांदा/बबेरू, कृपाशंकर दुबे । रामलीला में कलाकारों ने धनुष यज्ञ लीला का मनमोहक मंचन किया। राजा जनक की पुत्री सीता से विवाह करने के लिए प्रभु राम को शिव के धनुष को तोड़ना पड़ा। धनुष तोड़ते ही सीता ने प्रभु के गले वर माला डाल दिया। इस पर आसमान से देवताओं ने पुष्प वर्षा की। मंगल गीत गाए गए। इस दृश्य को देखकर श्रद्धालु विभेर हो उठे। परशुराम.लक्ष्मण संवाद का मंचन भी किया गया। जिसे श्रद्धालुओं ने मंत्र मुग्ध होकर देखा।
रामलीला मंचन के दौरान भगवान श्रीराम और सीता की झांकी
बबेरू क्षेत्र के कोर्रम गांव में 18 दिवसीय रामलीला में कलाकारों ने धनुष यज्ञ व परशुराम लक्ष्मण संवाद का भावपूर्ण मंचन किया। रामलीला शुरू होने से पहले ही पूरा पंडाल दर्शकों से भर गया। आरती और पूजन के बाद रामलीला शुरू हुई। विदेहराज जनक ने अपनी सुपुत्री सीता की शादी के लिए भव्य स्वयंवर का आयोजन किया है। उनका प्रण है कि जो योद्धा शिव जी का धनुष तोड़ेगा। वही उनकी पुत्री  सीता के साथ विवाह  करेंगे। इस स्वयंवर में शामिल होने के लिए देश.विदेश से तमाम राजा पधारे हैं। स्वयंवर देखने के लिए अयोध्या नरेश महाराज दशरथ के सुपुत्र राम व लक्ष्मण भी गुरु विश्वामित्र के साथ पहुंचे हैं। स्वयंवर के दौरान लाख प्रयास के बाद भी कोई भी राजा धनुष तोड़ना तो दूर शिव धनुष को टस से मस नहीं कर पाया। यह देख जनक का मन व्यथित हो जाता है। इससे दुखी होकर वे कहते हैं कि अगर उन्हें मालूम होता कि पृथ्वी वीरों से खाली हो गई हैए तो वे ऐसा प्रण कदापि न करते। यह सुन लक्ष्मण क्रोधित हो गए और गुरु से धनुष तोड़ने की आज्ञा मांगे। गुरु व भ्राता राम के समझाने पर उनका क्रोध शांत हुआ। बाद में गुरु की आज्ञा से भगवान राम शिव धनुष को तोड़ दिए। धनुष टूटते ही पंडाल में जय श्री राम नाम का जय घोष होने लगा। इस मौके पर भाजपा नेता पीसी पटेल जनसेवक, अरुण कुमार पटेल, रामलीला समिति अध्यक्ष देवेंद्र कुमार शुक्ल, विचित्रवीर पांडेय, संतोष बाबू, कुन्नाराम पटेल सहित सैकड़ों की संख्या में लोग  मौजूद रहे।

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