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ट्रेन से टकराया तेंदुआ, मौत

विलुप्तप्राय वन्य जीवों को संरक्षण देने में वन विभाग नाकाम
इसके पहले भी ट्रेन से मर चुके हैं बाघ, तेेदुआ, भालू
प्रतिवर्ष काल के गाल में समा रहे दर्जनों वन्य प्राणी

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरी । ट्रेन से टकराए तेंदुआ के मौत की घटना फिर सामने आई है। वन्य जीवों की मौत का सिलसिला बदस्तूर जारी है। विलुप्तप्राय वन्य प्राणी संरक्षण के अभाव में लुप्त हो रहा है, लेकिन विभाग के पास एसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे वन्य जीवों की ट्रेनों से होने वाली मौतों को रोका जा सके। तराई जंगल के बीच से गुजरी रेलवे लाइन वन्य प्राणियों के लिए काल साबित हो रही है। 

हावड़ा-मुंबई रेल मार्ग के सतना-मानिकपुर रेलखंड के मध्य इंटवा स्टेशन के पास बीती रात तेंदुआ की ट्रेन से टकराने पर मौत हो गई। यह सूचना तब मिली जब रेल कर्मी पेट्रोलिंग कर रहे थे। रेल कर्मियों ने तेंदुआ के मरने की सूचना तत्काल वन विभाग को दिया। वन अमला सक्रियता दिखाते हुए फौरन घटना स्थल पर पहुंच कर तेंदुए के शव को कब्जे मे लिया। इस क्षेत्र मे ट्रेन से कटकर अक्सर जंगली जानवरों की मौत होती रहती है, लेकिन सरकार के पास एसा कोई योजना नहीं है की वन्य जीवों के मौत को ट्रेन से रोका जा सके। इसके पूर्व चितहरा रेलवे स्टेशन के पास बाघ की ट्रेन से कटने से मौत हो गई थी। इसी तरह इंटवा-टिकरिया के बीच भालू ट्रेन से कट गया था। पिछले महीनें टिकरिया, मारकुंडी स्टेशन के बीच तेंदुआ की ट्रेन से कटकर मौत हो चुकी है। एसे ही प्रत्येक वर्ष दर्जनों वन्य प्राणी काल के गाल मे समा जाते हैं। वन विभाग इनकी सुरक्षा में नाकाम है।


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