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अच्छों की कमी पत्रकारिता में............ देवेश प्रताप सिंह राठौर (वरिष्ठ पत्रकार)

आज भारत देश में पत्रकारिता एक बहुत ही सुलझी हुई समझी हुई पढ़ी-लिखी कौम को गिना जाता है, परंतु क्षेत्रीय छोटे-छोटे पेपर वालों ने इस तरह के पत्रकार बना दिए हैं जिनकी शिक्षा हाई स्कूल भी नहीं ऐसेपत्रकार जाकर लोगों से इस तरह दुर्व्यवहार करते हैं और मोहल्ले ,कूचे में अपनी इस तरह से रोव झड़ते हैं, पत्रकार के रूप में जो अच्छे पत्रकारों के लिए एक बनी हुई साख को गिराने का काम कर रहे हैं वैसे मीडिया को चौथा स्तंभ माना जाता है लेकिन यह जाने की जरूरत है जो लोग ऐसे लोगों को नियुक्त करके अपने गोरखधंधा को गलत तरीके से चलाने का कार्य करते हैं, वह पत्रकारिता के नाम को कलंकित कर रहे हैं पत्रकार एक ऐसी कार्यशैली  है ईमानदारी के साथ स्पष्ट तौर पर लिखने का आम जनमानस तक पहुंचाने का एक माध्यम होता है ।ना की दलाली मक्कारी का एक केंद्र बना लिया जाए जहां पर यह केंद्र ऐसा बन जाएगा जहां दलाली मक्कारी शुरू हो जाएगी वह पत्रकारिता स्पष्ट तौर पर ईमानदारी से नहीं लिख शक्ति है ,वहीं आज के दौर पर चल रहा है। मैं सरकार से कहूंगा इन पत्रकारों के ऊपर भी कोई ऐसा अंकुश बनाना चाहिए ऐसा मापदंड   होना चाहिए इसके तहत इनकी नियुक्त हो और हर एक डांटा छोटे से लेकर बड़े पेपर तक का जिला अधिकारी के समक्ष सूचना विभाग के समक्ष उसे रखा जाना चाहिए तथा उस को संज्ञान में रखकर उसको उच्च मापदंड के दायरे में सही पाया जाए तो उसे रखने का हक होना चाहिए जो दबाव रहित हो आज पत्रकार अच्छे पत्रकारों की क्रेडिट को खराब कर रहे हैं। यह बहुत बड़ा चिंतनीय विषय है

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