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अंतःकरण से पुकारने पर नंगे पांव दौड़े आते हैं भगवान

कथावाचक ने ध्रुव चरित्र की कथा का किया बखान 

अतर्रा, कृपाशंकर दुबे । श्रीमद्भागवत कथा में कथाव्यास दीपक कृष्ण महाराज ने कपिल महाराज व ध्रुव चरित्र सुनाते हुए कहा कि व्यथा एक दिन कथा बन जाती है, जो सुख में भगवान का स्मरण करते हैं तो भक्त के ऊपर विपत्ति आने के समय अंतःकरण से आवाज लगाने पर भगवान नंगे पैर दौड पड़ते है ।
नगर के रेलवे स्टेशन के पास चल रही श्रीमद्भागवत कथा में भागवताचार्य दीपक कृष्ण ने कहा कि ध्रुव की माता
श्रीमद्भागवत कथा वाचक का माल्यार्पण करते हुए अनंत दीक्षित व उनकी पत्नी।
सुनीति धार्मिक कार्यों में रत रहती थी। जिसका प्रभाव ध्रुव पर था। जबकि सौतेली मां सुरूचि ध्रुव को राज्य का उत्तराधिकारी समझ इष्र्या रखती थी ।एक दिन पिता दूसरी मां सुरुचि के साथ राजसिंहासन में बैठे थे उसी दौरान ध्रुव वहां पहुंच जाते हैं और पिता की गोद में बैठने की जिद करते हैं। सौतेली मां सुरुचि ध्रुव को झिटकते हुए कहती है कि तुम्हें इस गोद में बैठने के लिए तपस्या करनी होगी। जिससे ध्रुव को बहुत कष्ट हुआ और उन्होंने पांच वर्ष की उम्र में ही मां सुनीति से आज्ञा लेकर वन में जाकर घोर तपस्या करते हैं और भगवान को प्रसन्न कर ईश्वर की गोद में विराजमान होते हैं। इस अवसर पर परीक्षित माधुरी दीक्षित, विद्याभूषण दीक्षित, यजमान अनंत दीक्षित सहित कांग्रेस वरिष्ठ नेता साकेत बिहारी मिश्र, रामकिशोर तिवारी, रामसुमेर त्रिपाठी, पूर्व अध्यक्ष अर्जुन मिश्र, डा. संजय पांडेय, जीतू बाजपेयी, बीरेंद्र दुबे, अनिल साहू सहित सैकड़ों की तादाद में श्रोतागण मौजूद रहे।

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