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गौवद्धन लीला की कथा सुना प्रकृति प्रेम का दिया संदेश

श्रीमद् भागवत कथा का पांचवा दिन

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरी । श्रीमद् भागवत कथा में कथा प्रवक्ता आचार्य प्रदीप महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण बाल लीलाओं व गोवर्द्धन लीला का भावपूर्ण वर्णन किया। कहा कि जीव बंधन में बंधा है। जब तक जीव परमात्मा के प्रति समर्पित नहीं होता तब तक बंधन मानता है, लेकिन जब हरि का भजन करता है तो वह जीव मुक्त हो जाता है।

सीतापुर सेठ बगिया के पूर्व न्यू कालोनी स्थित सुरेश द्विवेदी के आवास में चल रही श्रीमद भगवत कथा के पांचवें दिन भागवताचार्य प्रदीप महाराज ने कहा कि चिंतन करना चित्त का धर्म है। निश्चय करना बुद्धि व संकल्प मन का विषय है जो कर्मों में करता है वह राजनीतिज्ञ है। कहा कि जो भगवान की सच्ची उपासना करता है वह भागवत भक्त है। पूर्व जन्म के अनेक संचित पापों का फल व्यक्ति को भोगना पडता है। समय-समय पर औषधि, दान, पुष्प, जप, होम एवं देवार्चन से कष्ट कटता रहता है। गरीब को रोटी, साधु को लंगोटी की बड़ी चिंता है, लेकिन सनातन धर्मावलंबियों को अपनी चोटी की कोई चिंता नहीं है। यह बडे दुख का विषय है। जबकि पूर्वजों ने शिक्षा देकर भी शिखा सूझ को जीवंत रखा। कहा कि रामायण, गीता संयोग का विषय है जो कि जन्माो के पुण्योदय के फल से प्राप्त होता है। भागवताचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को सुनाया। बताया कि भगवान ने गोपियों के मन को चुराया। गोवर्द्धन पूजा कर प्रकृति रक्षा सच्ची आराधना पूजा एवं तपस्या है। नदियों, वृक्षों को बचाए तभी पर्यावरण पवित्र रहेगा। कहा कि एक वृक्ष सभी लोग अवश्य लगायें। इस मौके पर यजमान श्रीमती प्रेमा द्विवेदी, सियाराम दुलार द्विवेदी के अलावा सैकडों श्रोतागण मौजूद रहे। आरती के बाद प्रसाद वितरित किया गया।


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