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रामायण मेला के समापन पर फूलों की होली

लोक गायिका मालिनी अवस्थी के भजनों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरी । अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की ख्यातिप्राप्ति लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने टीम के साथ गीतों और भजनों का प्रदर्शन कर रामायण मेला भवनम् में उपस्थित हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उत्तर मध्य सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज से आई श्रीमती पूर्णिमा कुमार ने अपने साथी कलाकारों के साथ ढेढिया और झूमर नृत्य का जो मनोहारी प्रस्तुतीकरण किया जिसे देख दर्शक भाव विभोर हो गये। इसके बाद सूचना एवं
प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ से आये कलाकारों ने भजन एवं नृत्य प्रस्तुत किया। आकाशवाणी की कलाकार झांसी से आई लोक गायिका मधु अग्रवाल ने ‘पलनवा में झूलें दशरथ के चारों ललनवा’ गाकर दर्शकों को आनंदित किया। बुंदेलखण्ड की मशहूर भजन मंडल की कल्पना चैहान, मनोरमा और सुनोरमा चैहान ने भजनों से समां बांध दिया। भक्तिरस से सराबोर भजनों पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया। बुन्देलखण्ड के मशहूर आकाशवाणी कलाकार लोक गायक रामाधीन आर्य ने लोक गीत के माध्यम से भगवान श्रीराम की महिमा का सुंदर वर्णन किया। राष्ट्रीय रामायण मेला के महामंत्री करुणा शंकर द्विवेदी ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन किया। रात्रिकालीन कार्यक्रमों की कड़ी में वृंदावन की
लोक गायिका मालिनी अवस्थी व फूलों की होली के दौरान राधा-कृष्ण पर पुष्प वर्षा करते कार्यकारी अध्यक्ष।
ख्यातिलब्ध रास एवं रामलीला मंडली के पं देवकीनंदन शर्मा के नेतृत्व में वृंदावन रासलीला संस्थान के कलाकारों ने होली लीला की मनोहारी प्रस्तुति देकर रामायण मेला के इस सत्र का समापन किया। मेले में आये सभी आगंतुकों को राष्ट्रीय रामायण मेला के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश कुमार करवरिया ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह को व्यवस्थित रुप से संचालित करने के लिये मेले के पांचों दिन पूजा-अर्चना समिति, शोभायात्रा समिति, कार्यालय, स्वागत, आवास व्यवस्था, परिवहन व्यवस्था, भोजन व्यवस्था, साउण्ड एण्ड लाइट, मंच व्यवस्था जैसी अनेक समितियों के प्रद्युम्न कुमार दुबे (लालू भैया), राजाबाबू पाण्डेय, शिवमंगल प्रसाद शास्त्री, मो यूसुफ, मो इम्तियाज, ज्ञानचंद्र गुप्ता, राजेन्द्र मोहन त्रिपाठी, माधव बंसल, पंकज अग्रवाल, आशीष पाण्डेय, बिहारी बाबू, नत्थू प्रसाद सोनकर, दद्दू महाराज, मुन्ने खाँ, बबली कुशवाहा, भोलाराम, मनोज गर्ग, कलीमुद्दीन बेग, घनश्याम अवस्थी, प्रिंस करवरिया आदि ने मेले की सम्पूर्ण व्यवस्थाओं को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया। 

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