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मौरम कारोबारियों के लिये सुरक्षित हब बना बंगरा कस्बा

मौरम के लिए चर्चित बंगरा में नहीं होती सटीक कार्रवाई 
आडियो वायरल होने के बाद एसपी ने तीन सिपाहियों को किया लाइन हाजिर

उरई (जालौन), अजय मिश्रा । अवैध मौरंग के लिए हब बन चुके बंगरा में सच्चाई कुछ भी हो लेकिन सच मायने में कार्रवाई उचित न होने से पुलिस के ऊपर बदनामी के छींटे सबसे ज्यादा आते हैं। मौरंग माफिया, राजनेता और सोशल मीडिया का सबसे ज्यादा दबाव पुलिस पर ही आता है। जबकि ओवरलोड और खनिज के मामले में परिवहन और खनिज विभाग की संलिप्तता होने के बाद वह बचे रहते हैं।
हाल ही में पुराना ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें पुलिस कर्मी और मौरंग माफिया की ट्रक निकालने को लेकर बातचीत हो रही है। ऐसे में सोशल मीडिया पर सिर्फ पुलिस ही दोषी क्यों? आखिर में इन माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? यह बहुत बड़ा सवाल है। क्योंकि पुलिस से ज्यादा दोषी तो यह यह अवैध कारोबारी हैं। यह अपने मंसूबे पूरे करने के लिए मीडिया को टारगेट करते हैं, अधिकारियों के ऊपर ट्रक चढ़ाने की भी जुर्रत करते हैं, इनके खिलाफ कोई लिखे या बोले उनको इनकी धमकियों का सामना करना पड़ता है। राजनीतिक संरक्षण में इनके हाथ और भी लंबे हो जाते हैं। एक सप्ताह से खनिज का अमला बंगरा में चैकसी बरत रहा है। उसके बावजूद आखिर में ओवरलोड और अवैध मौरंग ट्रक वहां से कैसे पास हो रहे हैं? खबरें तो यहां तक है कि प्रतिदिन प्रति ट्रक के हिसाब से मोटा पैसा लेकर इनको पास कराया जाता है। बेशक! सीसीटीवी कैमरे लगे हो लेकिन 24 घंटे की रिकॉर्डिंग देख ली जाए तो सब स्पष्ट हो जाएगा कि कैमरों को कब बंद किया जाता है? यही भी मान लिया जाए कि अब सब ठीक है और मौरंग ट्रक नहीं आते तो फिर खाली ट्रक पूरे दिन मध्य प्रदेश के बॉर्डर की ओर क्यों जाते हैं? इससे कहीं ना कहीं यह साबित होता है कि सब कुछ लंबे पैमाने पर है। जिसमें पुलिस ही नहीं अन्य लोग भी दोषी हैं। जिनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी ही चाहिए। हालांकि ऑडियो वायरल मामले में पुलिस कप्तान ने तीन पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया। लेकिन आडियो में पैसे देकर मौरंग ट्रक ले जाने वाले माफिया पर कार्यवाही होना बाकी है।

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