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दिल्ली के चुनाव में रचनात्मक प्रणाम

 देवेश प्रताप सिंह राठौर 
(वरिष्ठ पत्रकार)

 दिल्ली के विधायकी के चुनाव  होने को है अव समय बिल्कुल निकट आ गया है। लेकिन एक बात आपने देखी दिल्ली के चुनाव में यही केजरीवाल जी है जेएनयू में जब दंगा छात्र करते हैं भारत तेरे टुकड़े होंगे आजादी की बात करते हैं तुरंत केजरीवाल जेएनयू पहुंचते हैं और कन्हिया कुमार गद्दार उमर खालिद के साथ खड़े दिखते हैंऔर उन गद्दारों के साथ कंधा मिला मिलाकर खड़े होते हैं। लेकिन साइन बाग में 54 एवम् 55 दिन के लगभग हो गए हैं धरना चल रहा है रोड जाम किए हुए पर केजरीवाल अपनी शक्ल दिखाने  नहीं गए, क्यों नहीं वह  जानते हैं कि जनता है ऐसी जगह फेंकेगी जहां अन्ना हजारे के साथ राजनीति शुरू की थी अब कोई पानी को भी नहीं पूछेगा जहां पानी नहीं मिलेगा। और साइन बाग में जिस तरह से धरना प्रदर्शन चल रहा है एक सोची-समझी रणनीति के तहत विपक्ष वालों के कारनामे  हो सकते हैं। आज से  14 साल पूर्व केजरीवाल को कोई नहीं जानता था अन्ना हजारे के साथ लोकपाल बिल ले कर आए और   धरना प्रदर्शन किया और अन्ना हजारे के साथ अरविंद  रहे तथा अन्ना हजारे तो जहां पर थे वहीं पर रह गए लेकिन अरविंद केजरीवाल को दिल्ली का मुख्यमंत्री बना गए
जिस तरह ईमानदारी की छवि लेकर अरविंद केजरीवाल उठे थे आज छवि 80 परसेंट तक कम हो गई है, 20 परसेंट लोग अभी भी केजरीवाल को दिल्ली में समर्थक  हैं मेरा सर्वे के मुताबिक क्योंकि ज्यादातर सर्वे यही कह रहे हैं कि केजरीवाल की सरकार बनेगी दिल्ली में लेकिन मैं विश्वास के साथ कहता हूं कि 40 सीटें भारतीय जनता पार्टी की आएंगी और बढ़ भी सकती हैं पता नहीं कैसे समीकरण लोग बनाकर कहते हैं हो सकता है चुनाव में कुछ भी उलट-पुलट होने में देर नहीं लगती है आपने छत्तीसगढ़ के चुनाव में देखा रमन सिंह मुख्यमंत्री बनना तथा सारे एग्जिट पोल सारे विशेषज्ञ सारे बुद्धिजीवी सब यही कह रहे थे पर जब चुनाव परिणाम आए तो सोचा भी नहीं था वह समीकरण आए सामने देश ने और जाना, एक बात और है दिल्ली के चुनाव में मैंने देखी केजरीवाल को खांसी बंद नहीं होती है इतने बड़े आदमी हो गए हैं इतने इतने डॉक्टर इनके पास हैं फिर भी खास ते रहते हैं यह खास्ते हैं कि खासने की नौटंकी करते हैं। जनता को मूर्ख बनाते हैं देश में जनता को मूर्ख वाशी पार्टियों ने बनाया है उसमें एक पार्टी जाती है लालू प्रसाद यादव की पार्टी जेडीयू जो नौटंकी बाजी के महारत हासिल थी आज वह जेल में हैं खास बात आप देखिए जिस जेल को बनवा कर उद्घाटन किया उसी जेल के अंदर बैठे हैं सजा काट रहे हैं क्योंकि चारा बहुत चबा गए थे। हद से ज्यादा कोई काम होगा तो उसके प्रणाम आज नहीं कल घातक होते हैं। इन लोगों के लिए जेल जेल नहीं होती है जेल तो गरीब के लिए होती है इस से काम लिया जाता है झाड़ू लगाई जाती है खेत जोत उड़ाए जाते हैं पानी भरवाया जाता है सब्जी कटवाई जाती है लिपवाया जाता है। वह जेल है खाने में गत सबसे गंदा खाना मिलता है कोई मिल नहीं सकता है इतवार को ही मिलना हो पाता है वह जेल है यह लो की जेल तो बिल्कुल आशियाना है इस पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए गरीब को जेल है अमीर को जेल में सब सुविधाएं क्यों है क्या कोई ऐसा सर्कुलर बना है उसको सारी सुविधाएं प्राप्त होगी माना विधायक व सांसद काय के हिसाब से जेल निर्धारित होती है परंतु यह कब तक चलता है सांसद विधायक निरस्त होने के बाद भी आलीशान तरीके से रहना यह जेल मैनुअल में क्या

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