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अजीत डोभाल के हाथों दिल्ली की सुरक्षा

देवेश प्रताप सिंह राठौर 
(वरिष्ठ पत्रकार)

दिल्ली में जिस तरह से नागरिकता संशोधन बिल पर कोहराम मचा हुआ हैअब अजीत डोभाल की हार दिल्ली की सुरक्षा की बागडोर संभाल ने का कार्य दिया गया है। और इस समय कोहराम मचा हुआ था जब विश्व की महान शख्सियत भारत में और वह भी दिल्ली में मौजूद थी जिसका नाम है डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बहुत दुखद बात है कि नागरिकता संशोधन बिल पर किसी नागरिक को नहीं जाना है भारत के रहने वाले मुसलमानों को फिर भी इतना आतंक मचाए हुए हैं समझ में नहीं आता है इनकी राजनीति इनकी नीति एवं सोच क्या है।राष्ट्रीय खेल दिल्ली हिंसा व्यापार मनोरंजन ऑटो
 दिल्ली में सांप्रदायिक दंगा नहीं नियोजित नरसंहार, यह गुजरात दंगे की याद दिलाता है, दिल्ली हिंसा पर बोले ओवैसी ओवैसी ने कहा- प्रधानमंत्री अब क्यों नहीं कहते कि देश में रहना है तो यहां का नागरिक  दिल्ली में सांप्रदायिक दंगा नहीं नियोजित नरसंहार, यह गुजरात दंगे की याद दिलाता है, दिल्ली हिंसा पर बोलेओवैसीएआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सासंद असदुद्दीन ओवैसी।  ऑलइंडियामजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन(AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने दिल्ली में चार दिन से जारी हिंसा को नरसंहार करार दिया है। उन्होंने कहा, "दिल्ली में जो भी हो रहा है उसे साम्प्रादायिक दंगे नहीं कहा जा सकता। यह पूर्व नियोजित नरसंहार है। यह हमें गुजरात 2002 की याद दिलाता है। लेकिन अल्लाह न करे यह उसी तरह आगे बढ़े। जिस तरह भाजपा सरकार की खामोशी है। उसकी तरफ से कोई हरकत नहीं की जाती, एक सन्नाटा मेंटेन किया जाता है। यह पक्के तौर पर पूर्व नियोजित है। ओवैसी का गलत बयान बाजी एक दुर्घटना घटना का कारण बनती है
ओवैसी ने आगे कहा, "मैंने कल ही एक बयान दिया था कि दिल्ली में दंगे रोकने के लिए सेना को बुलाया जाए। दिल्ली पुलिस दंगे नहीं रोक पाएगी, क्योंकि वह बराबर की मुल्जिम है इन घटनाओं में। दिल्ली पुलिस इन लोगों को बढ़ावा दे रही है। पुलिस ही लोगों पर पत्थर फेंक रही है। पुलिस दंगाइयों के साथ मिली हुई है। तो आखिर यह रुकेगा कैसे
आप के मंत्री-सांसद ने केंद्र सरकार से लगाई गुहार- हिंसा प्रभावित इलाकों में तैनात करें सेना, बोले- 'गृह मंत्री जी अब तो जाग जाइए'एक द‍िन में 12 साल का लड़का समेत 21 लोग गोली से घायल, 19 वर्षीय नौजवान के स‍िर में घुसेड़ी ड्र‍िल
'गृह मंत्री होने का सबूत दें अमित शाह'
भारत की राजधानी में हो रहा है दंगा। आपके पास 308 सांसद हैं। क्या फायदा अगर आप दिल्ली को बचा नहीं सकते। दिल्ली में होम मिनिस्टर का ऑफिस है। क्यों नहीं अमित शाह प्रभावित इलाकों में नहीं जाते, जहां मस्जिद पर हमला हुआ। आप इलेक्शन कैंपेन में 4 दिन गुजारेंगे दिल्ली में। आज आप गृह मंत्री होने का सबूत दीजिए। यह नाकामी सरकार की और गृह मंत्रालय की है कि वे दंगे रोकने में नाकाम र
भाजपा ने आज नफरत फैला दी है और जो वर्दी में हैं उनके दिमाग तक में नफरत डाल दी है। जो लोग आज मरे हैं उसकी जिम्मेदार भाजपा है। क्यों प्रधानमंत्री नहीं कहते कि देश में रहना है तो सिर्फ भारत का नागरिक बन कर रहना है। दिल्ली की सुरक्षा की बागडोर बहुत पहले अजीत डोभाल को देनी चाहिए थी इतनी देरी क्यों की गई 3 महीने से जिस तरह आतंक फैला हुआ है पूरा देश विचलित है कि कानून क्यों नहीं इस पर ,सरकार क्यों नहीं शक्ति कर रही है अब डरना चाहिए इन उपद्रवियों को क्योंकि यह देश हित में ठीक नहीं है। इन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जरूरत है आज किसने को देखते हुए।

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