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स्वार्थ नहीं, सेवा है राजनीति: उमा भारती

राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ समापन  

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरी । भारतरत्न नानाजी देशमुख की 10वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष में दीनदयाल परिसर में आयोजित पोषण एवं जल संस्कृति पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर एवं नानाजी को श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मलूक पीठेश्वर वृंदावन के संत राजेंद्र दास महाराज, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी, दीनदयाल शोध संस्थान के संरक्षक मदन दासी, मप्र की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, राज्यसभा सदस्य प्रभात झा, मप्र भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, उप्र सरकार के लोक निर्माण मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, विधायक रीवा राजेंद्र शुक्ला, विधायक मऊ उषा ठाकुर, विधायक नीमच संजय मारू, छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री चंद्रशेखर साहू, विधायक मुकेश तिवारी, दीनदयाल शोध संस्थान के अध्यक्ष वीरेंद्रजीत सिंह, उपाध्यक्ष डॉ नरेश शर्मा, डॉ भरत पाठक एवं प्रधान सचिव अतुल जैन, संगठन सचिव अभय महाजन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। 

नानाजी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राज्यसभा सदस्य प्रभात झा ने कहा कि चित्रकूट के विकास के पर्याय हैं। उन्होंने एक अनूठा उदाहरण पेश किया है कि किस तरह समाज के सहयोग से ही इतना बड़ा काम खड़ा किया जा सकता है। उनके चेहरे पर एक ही भाव दिखता था। समृद्ध गांव, उनका मानना था कि गांव सर्वोपरि है उनका सुदृढ़ होना जरूरी है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि मंच ंसे एक सभा में कहा था कि मैं अब चुनाव नहीं लडूंगी तो मीडिया ने समझ लिया कि मैंने राजनीति छोड़ दी। हमें नानाजी जैसे व्यक्तित्व से ही समझ आता है कि राजनीति चुनाव का विषय नहीं है, राजनीति सेवा के लिए हैं स्वार्थ के लिए नहीं। सेवा में सार्थकता का बोध होता है। मेरा जन्म गंगा के लिए हुआ है। मैंने गंगा को नहीं पकड़ा, गंगा ने मुझे पकड़ा है। गंगा मूलतः समाज की और संतों की धारा है। गंगा के प्रति श्रद्धा और जिम्मेदारी दोनों का भाव लाना पड़ेगा। नानाजी एक अद्वितीय व्यक्तित्व थे। जब-जब शरद पूर्णिमा आती है उनको याद करती हैं। लोक निर्माण विभाग के मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि नानाजी का हर काम एक अभिनव प्रयोग की तरह होता था। चाहे वह गोंडा जनपद में बांस के पाइप से सिंचाई का प्रयोग हो या देशी उन्नत किस्मों व बीजों के संरक्षण का हो। गांवों में हो रहे उनके सारे काम अनुकरणीय व मिसाल हैं। प्रधान सचिव ने संचालन करते हुए कहा कि नानाजी का मानना था कि विकास का मॉडल देशानुकूल और युगानुकूल होना चाहिए। इसलिए इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के माध्यम से वनवासी बंधुओं की जो भौतिक संपदा है उसको रेखांकित करते हुए जनजाति लोगों का सामाजिक आर्थिक विकास की दृष्टि से ट्राइफ्रेड के माध्यम से प्रधानमंत्री की वन धन योजना को बताया। मलूक पीठेश्वर संत राजेंद्र दास महाराज ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यहां आकर गुरुजी और नानाजी के साथ की आत्मीय संबंधों स्मृतियां ताजा हुई है। संस्थान अध्यक्ष ने सभी के प्रति आभार जताया। 


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