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संघर्षो के बाद मिली है आजादी, चैरी चैरा कांड पर कार्यशाला डा. भवानीदीन

हमीरपुर, महेश अवस्थी । प्राचार्य डा. भवानीदीन ने कहा कि चैरी चैरा के सत्याग्रहियों का आजादी के लिए संघर्ष स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरणा बना। गांधी जी ने 1920 में असहयोग आन्दोलन अंग्रेजो के विरूद्ध चलाया जो अहिंसक संग्राम था। इसे पहला समन कहा जा सकता है। भारतीय आजादी के संघर्षयीय आलोक में चैरी चैरा कांड को भुलाया नही जा सकता। वे केवी शिवहरे महाविद्यालय मंे जरा याद करो कुर्बानी के तहत सत्याग्रहियों की सहादत का साक्षी चैरी चैरा कांड पर कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होने कहा कि 5 फरवरी 1922 को
गोरखपुर जिले में चैरी चैरा गांव में सत्याग्रही थाने के सामने से जुलूस निकाल रहे थे। थानेदार ने इस जुलूस को अवैध घोषित कर दिया। एक सिपाही ने गांधी टोपी को पैरो से रौंद दिया। इस पर विरोध हुआ, पुलिस ने फायंिरंग की, 11 सत्याग्रही मारे गये, 50 घायल हुए। गोलिया खत्म होने पर पुलिसवाले थाने की ओर भागे। भीड मे एक व्यक्ति ने एक टीन मिट्टी का तेल मूंझ सरपत का बोझ उठाया थाने को घेरकर आग लगा दी। इस अग्निकांड मे दरोगा समेत 21 पुलिसवाले मारे गये थे। गांधी जी इस घटना से दुखी हुए। पुलिस ने सैकडो लोगो को अभ्यिुक्त बनाया। मदन मोहन मालवीय ने इसका मुकदमा लड़ा। 172 लोगो को सजा ए मौत मिली। सरकार मे अपील हुयी जिसमंे 19 को मृत्युदंड, 16 को काला पानी, 8 को पांच साल की सजा, 38 लोगो को बरी कर दिया गया। यह घटना बताती है कि आजादी संघर्षो के बाद मिली है। डा. श्यामनारायन, डा. रमाकांत पाल, आरती गुप्ता नेहा यादव, देवेन्द्र त्रिपाठी मौजूद थे। 

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