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शान्तीनगर काण्ड: मुखिया की नशेड़ी प्रवृत्ति व आर्थिक तंगी बनी मौत का कारण

रोज-रोज की खटपट के चलते मृतका ने उठाया यह बड़ा कदम 
मरने वाली बेटियों में दो नाबालिग

फतेहपुर, शमशाद खान । शहर के शान्तीनगर मुहल्ले में हुयी दुखद घटना पर यदि गौर किया जाये तो कई पहलू निकलकर सामने आ रहे हैं। मुखिया की नशेड़ी प्रवृत्ति व आर्थिक तंगी को मौत का कारण माना जा रहा है। रोज-रोज की खटपट से आजिज आकर श्यामा देवी ने यह बड़ा कदम उठाया और उसने अपनी चार पुत्रियों संग सल्फास खाकर जीवन लीला समाप्त कर ली। मरने वाली बेटियों में दो नाबालिग शामिल हैं। अब सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी घटना के लिए जिम्मेदार कौन है। मुफलिसी का जीवन जीने के बावजूद इस दलित परिवार को किसी तरह की शासन की योजनाएं न मिलना भी बड़ा सवाल है। पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। उधर मुखिया को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ के बाद भेज भेज दिया। 
बताते चलें कि शहर के शांतीनगर इलाके की मलिन बस्ती में लगभग 65 वर्षीय दलित रामसागर के चार बेटों का परिवार अलग-अलग रहता है। सबसे बड़ा बेटा राम भरोसे का परिवार जिसमें उसकी लगभग 40 वर्षीय पत्नी श्यामा देवी, उसकी लगभग 21 वर्षीय पुत्री पिंकी, लगभग 18 वर्षीय प्रियंका, लगभग 13 वर्षीय वर्षा एवं 8 वर्षीय
कमरे से शवों को बाहर निकलवाते पुलिस कर्मी।
ननकी रहती थीं। राम सागर का परिवार उसकी नशे की तगड़ी लत के चलते एक दशक से भी अधिक समय से काफी परेशान था। श्यामा शांतीनगर स्थित निरंकारी बालिका इण्टर कालेज में एमडीएम योजना के तहत खाना बनाने (रसोईयाँ) की नौकरी करके किसी तरह अपने परिवार का पेट पाल रही थी और इसी विद्यालय में दो नाबालिग बेटियों को किसी तरह पढ़ाती भी थी। बड़ी बेटी पिंकी एमजी डिग्री कालेज से स्नातक भी कर रही थी और ट्यूशन पढ़ाकर माँ के साथ घर चलाने में मदद भी करती थी। पूरा परिवार राम भरोसे की नशे की लत और उसकी झगड़ालू प्रवृत्ति से प्रायः परेशान रहता था। साथ में आर्थिक तंगी कोढ़ में खाज का काम करती थी, जिसके कारण परिवार में कलह भी बनी रहती थी। विगत गुरुवार को नशे की हालत में घर आये राम भरोसे से श्यामा का काफी विवाद भी हुआ था। क्योंकि वह पत्नी के साथ-साथ बेटियों पर हाथ भी उठा देता था और पैसे की माँग भी करता रहता था, जिसके कारण श्यामा, पिंकी समेत पूरा परिवार अवसाद ग्रस्त की स्थिति में पहुँच गया और इन सब झंझटों से स्थाई रूप से छुटकारा पाने का निर्णय ले लिया। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि श्यामा ने स्वयं या तो बड़ी बेटी पिंकी से जहर की चार पुड़िया मँगाई और शुक्रवार की सुबह घर का दरवाजा अन्दर से बन्द करके सभी को खाने में जहर दे दिया और स्वयं भी वही जहरीला खाना खाकर आत्महत्या कर ली। बताते है कि नशे की हालत में राम भरोसे कल शाम घर आया था किंतु दरवाजा न खुलने से वह गाली गलौज करता हुआ लौट गया। आसपास के लोगों की माने तो पहले भी उसकी ऐसी ही दिनचर्या रही है। इस कारण किसी को घर के अंदर इतनी बड़ी घटना होने का अंदेशा ही नहीं था। शनिवार की सुबह घर के अंदर से अजीबो गरीब दुर्गंध का आभास होने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। कोतवाली पुलिस जब मौके पर पहुँची और दरवाजा तोड़कर घर के अंदर पहुँची तो सभी होश उड़ गये। आनन-फानन में उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई और शवों को बाहर निकाल कर पंचनामा भरने के बाद पाँचों शवों को विच्छेदन के लिये भेज दिया गया। मौके पर पुलिस अधीक्षक प्रशांत वर्मा, उपजिलाधिकारी सदर प्रमोद कुमार झा, क्षेत्राधिकारी नगर कपिल देव मिश्रा, कोतवाली प्रभारी रवीन्द्र श्रीवास्तव सहित भारी फोर्स बल मौके पर पहुंचकर घटना की जांच पड़ताल में जुट गया है। उधर अपर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया आपसी कलह के कारण घटना को अंजाम देना लग रहा है।

छोटे से कमरे में सीमित था परिवार
फतेहपुर। पति एवं पिता की नशेबाजी एवं आर्थिक तंगी से तंग आकर पाँच लोगों द्वारा जहर खाकर आत्महत्या करने वाले परिवार के पास कुल आठ बाई तीस का प्लाट था जो पारिवारिक बँटवारे में मिला था। इस प्लाट में लगभग आठ बाई आठ का एक कमरा व हाल में बना अर्धनिर्मित शौचालय है। जिसमें धनाभाव के चलते शौचालय की सीट नहीं बैठाई जा सकी थी। घर के सभी सात लोग जिसमें दलित दंपत्ति व पाँचों बेटियाँ शौच के लिये घर से बाहर जाती थी। सवाल यह उठता है कि सरकार शौचालय निर्माण की दिशा में अत्यधिक गंभीर क्यों न हों किन्तु जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

नहीं मिला आवास व बीपीएल कार्ड का लाभ
फतेहपुर। चार लड़कियों के साथ जहर खाकर आत्महत्या करने वाली दलित श्यामा देवी ने सरकारी आवास और बीपीएल कार्ड के लिये कई बार आनलाइन आवेदन किया था। लेकिन जाँच में निर्धारित मानक पूरे न होने की बात कहकर लेखपाल ने कभी भी पक्ष में रिपोर्ट नहीं लगाई। जिसके चलते इस परिवार को जीवन यापन के लिये न तो सरकारी आवास मिला और न ही बीपीएल कार्ड बना। जिससे इस परिवार की समस्याएँ बढ़ती गई और अंत में पाँच लोगों को आत्महत्या के लिये विवश हो जाना पड़ा। ये अलग बात है कि श्यामा देवी के ससुर राम सागर के नाम पर बीपीएल कार्ड बना हुआ है जो मजदूरी करते है।

घर में मिली जहर की खाली पुड़िया
फतेहपुर। शहर के शांतीनगर इलाके में चार बेटियों के साथ आत्महत्या करने वाली दलित महिला ने खाने में जहर की कई पूड़ियाँ मिलाई थी। पुलिस ने घटनास्थल से जहर की पुड़ियों के रैपर भी बरामद किये है। घटनास्थल पर मिले गिलास व कटोरे को देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि सभी सदस्यों ने सल्फास को गिलास में घोल-घोलकर पिया और अन्तिम नींद के लिए सो गये। 

मुखिया पुलिस हिरासत में 
फतेहपुर। अपनी नशे एवं झगड़ालू प्रवृत्ति के चलते चार बेटियों और पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर कर देने वाले दलित रामभरोसे को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने उसे जब घटनास्थल के पास से पकड़ा तब भी वह नशे की हालत में था और पूरी तरह सेन्स में नहीं लग रहा था। ऐसी संभावना है कि उस पर अपने ही परिवार के पाँच सदस्यों को आत्महत्या के लिये उकसाने का मामला दर्ज किया जायेगा।

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