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करोड़ों रुपये के भूखंडों की फर्जी रजिस्ट्री

केडीए में फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों रुपये के भूखंडों की फर्जी रजिस्ट्री कर दी गई। पूर्व विधायक की शिकायत पर मामला खुलने के बाद किदवईनगर, जूही व पनकी योजना में भूमि की फर्जी रजिस्ट्री कराने के आरोप में केडीए सचिव ने लिपिक समेत 17 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस जांच में जुटी है।
किदवई नगर पनकी व जूही में आवंटित किए भूखंड

कानपुर गौरव शुक्ला:- केडीए सचिव एसपी सिंह के मुताबिक पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी ने जूही कलां में कई जमीनों की फर्जी रजिस्ट्री होने की शिकायत की थी। किदवईनगर की वाई स्कीम दो में भूखंड संख्या 260, पनकी ई ब्लॉक में भूखंड संख्या 40, 56 व 660, पनकी बी ब्लॉक में भूखंड संख्या 847, जूही डब्ल्यू ब्लॉक के भूखंड संख्या 120, 756, 1448, 38, 1343, 762 के फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और बिना आवंटन व भूमि मूल्य जमा कराए फ्रीहोल्ड प्रक्रिया कराने का आरोप लगाया था। प्राधिकरण की ओर से कमेटी बनाकर जांच कराई गई तो आरोप सही निकले। केडीए के प्रथम श्रेणी लिपिक कंचन गुप्ता और सेवानिवृत्त प्रधान लिपिक रामजी मिश्रा की संलिप्तता सामने आई। मामले में केडीए उपाध्यक्ष ने मुकदमा लिखाने के निर्देश दिए थे।

कानपुर देहात, मैनपुरी व इटावा के हैं आवंटी

स्वरूपनगर थाना प्रभारी अश्विनी कुमार पांडेय ने बताया कि डिफेंस कॉलोनी जाजमऊ निवासी रिटायर्ड प्रधान लिपिक रामजी मिश्रा, कल्याणपुर दयानंद विहार फेज दो निवासी लिपिक कंचन कुमार गुप्ता और आवंटियों में अकबरपुर (कानपुर देहात) निवासी विद्या देवी, हेस्टिंग रोड छावनी निवासी राम किशोर दीक्षित, मैनपुरी के ग्र्राम बिछिया निवासी कटोरी देवी, फूलन देवी, सुमन देवी, गुल्लू सिंह, गीता देवी शुक्ला, कुंती देवी, सोनी गढ़ी, इटावा के रीतापुर निवासी राजपाल सिंह, अकबरपुर (कानपुर देहात) की सिद्धेश्वरी देवी, रमेश चंद्र, महेश चंद्र, छोटे लाल, श्रीकृष्ण द्विवेदी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी की रिपोर्ट दर्ज की गई है।

जांच में अभी और अफसर-कर्मचारी फंसेंगे

फर्जी रजिस्ट्री का मामला सबसे पहले पूर्व केडीए उपाध्यक्ष ओएन सिंह ने वर्ष 2008 में पकड़ा था। इसमें पनकी में तीन दर्जन भूखंड पकड़े गए थे। कई की रजिस्ट्री निरस्त कर दी गई। इस प्रकरण में फंसे एक अफसर और एक कर्मचारी की मौत भी हो चुकी है। कई सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसके बाद तत्कालीन उपाध्यक्ष जयश्री भोज ने दस फर्जी रजिस्ट्री के मामले पकड़े। मुकदमा दर्ज कराया, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। फिर फाइल खुली है तो केडीए में खलबली है। इंदिरा नगर, साकेत नगर, लखनपुर, जूही, विश्वबैंक बर्रा और किदवईनगर योजना की जांच फिर से हो जाए तो कई खेल पकड़ में आएंगे।  

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