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अदालत ने लोनिवि के खाते किये सीज, मामला ठेकेदार के भुगतान का

450 करोड़ के भुगतान के किये थे आदेश

हमीरपुर, महेश अवस्थी । 48 वर्ष पूर्व ठेकेदार की जमानती धनराशि जब्त कर अनुबंध समाप्त करने के मामले में अदालत ने लोनिवि प्रान्तीय खण्ड के खाते सीज कर दिये। पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए ठेकेदार को 450 करोड रूपये की धनराशि भुगतान न किये जाने पर स्थानीय अदालत ने यह कार्यवाही की है। वहीं विभाग ने शासन से इस धनराशि की मांग की है। अधिशाषी अभियन्ता आरके श्रीवास्तव ने बताया कि ठेकेदार लाला उमराव ने वर्ष 1967 में शुरू हुए बेतवा पुल निर्माण के लिए लोनिवि प्रान्तीय खण्ड से अनुबंध
किया था। जिसमें कोठी निर्माण मे विभागीय अधिकारियेां ने कमी पाये जाने पर वर्ष 1972 में ठेकेदार की जमानती धनराशि को जब्त कर अनुबंध समाप्त कर दिया था। जिससे ठेकेदार का 2062 लाख रूपये का नुकसान हुआ। ठेकेदार ने कार्यवाही के लिए लखनऊ में गुहार लगायी जिसने ठेकेदार के पक्ष में फैसला दिया। इधर धनराशि की वसूली के लिए ठेकेदार ने सिविल जज सीनियर डिवीजन हमीरपुर में वाद दायर किया। विभाग ने आर्विटर के आदेश के खिलाफ हाइकोर्ट में याचिका की यहां विभाग को मुहकी खानी पड़ी विभाग सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मगर राहत नही मिली। इधर वर्ष 2017 में सिविल जज सीनियर डिवीजन ने 450 करोड़ रूपये देने का आदेश पारित किया। विभाग ने शासन को मांग पत्र भेजा। मगर भुगतान नही हो सका। ठेकेदार ने फिर अदालत की शरण ली। कोर्ट ने विभाग सीसीएल, डीसीएल के खाते सीज कर दिये। जिससे विभाग में खलबली मची हुयी है।

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