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पंचतत्व में विलीन हुआ शहीद कमांडो का पार्थिव शरीर

अंतिम दर्शन के लिए उमड़े कई गांवों के हजारों लोग 
सीआरपीएफ के आईजी, डीआईजी और कमांडेंट भी पहुंचे 
जिलाधिकारी, डीआईजी पुलिस, पुलिस अधीक्षक और आला अधिकारी रहे मौजूद 
अंतिम यात्रा में उमड़ा हजारों लोगों का जनसमूह 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । बांदा का लाल विकास कुमार वर्मा छत्तीसगढ़ के इरापल्लई जंगल में नक्सलियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गया था। मंगलवार की देर रात को शहीद का शव सीआरपीएफ के उच्चाधिकारी और सैन्य अफसर लेकर शहीद के पैतृक गांव बांदा जनपद के बांदा-बहराइच स्टेट हाइवे पर स्थित लामा गांव पहुंचे। अपने लाल की झलक पाने के लिए जहां परिजन बेचैन थे, वहीं सैकड़ों लोगों की जमा भीड़ भी देश सेवा करते हुए शहीद हो जाने वाले लाल का आखिरी दर्शन करने के लिए व्यग्र थे। शव लामा गांव पैतृक आवास में पहुंचते ही परिजनों ने ताबूत में रखे अपने लाल का पार्थिव शरीर देखा तो दहाड़े मारकर रो पड़े। किसी तरह से ग्रामीण महिलाओं और पुरुषों ने लोगों को संभाला। बुधवार की सुबह अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर रखा रहा। सीआरपीएफ के उच्चाधिकारियों और कमांडेंट, रिटायर्ड फौजियों और जिला पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने श्रद्धांजलि दी। इसके बाद हजारों लोगों के हुजूम के साथ अंतिम यात्रा अंत्येष्टि स्थल के लिए रवाना हुई। वहां राजकीय सम्मान के साथ पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। 
ताबूत में अपने पति के पार्थिव शरीर को निहारती शहीद विकास की पत्नी नंदिनी
मंगलवार की देर रात सीआरपीएफ के कोबरा कमांडों विकास कुमार वर्मा का पार्थिव शरीर सीआरपीएफ के उच्चाधिकारी और कमाडेंट कड़ी सुरक्षा के बीच लेकर शहीद के पैतृक आवास लामा गांव पहुंचे। वहां पर पहले से ही शहीद के परिजनों के अलावा गांव के सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा थी। ताबूत उतारकर जैसे ही घर के बाहर रखा गया, वैसे ही शहीद के परिजन ताबूत से लिपटकर रोने लगे। किसी तरह से सीआरपीएफ जवानों और ग्रामीणों ने ढांढस बंधाया। मंगलवार की पूरी रात शव ताबूत में ही सीआरपीएफ की निगरानी में रखा रहा।
अंतिम दर्शन के दौरान पुष्प चक्र अर्पित करते सीआरपीएफ के आईजी सुभाष चन्द्र
बुधवार की सुबह तकरीबन आठ बजे से अंतिम दर्शन के लिए शहीद का पार्थिव शरीर रखा गया। इस दौरान शहीद की गर्भवती पत्नी नंदिनी बिलख-बिलखकर रोते-रोते बदहवास होती रही। परिजन भी दहाड़े मारकर रो पड़े। इस दौरान आईजी सीआरपीएफ सुभाषचंद्र, सीआरपीएफ डीआईजी इलाहाबाद रेंज आर ड्यूडांग, डीआईजी सीआरपीएफ लखनऊ रेंज आरटी परमहंस, असिस्टेंड कमांडेंट सीआरपीएफ विजय कुमार यादव, असिस्टेंट कमांडेंट विक्रम प्रताप सिंह, असिस्टेंट कमांडेंट रोहित पाठक सीआरपीएफ, सीआरपीएफ सब इंसेपक्टर 204 बटालियन अशोक कुमार, डीआईजी चित्रकूटधाम परिक्षेत्र दीपक कुमार, जिलाधिकारी हीरा
पुष्प चक्र अर्पित करते जिलाधिकारी हीरा लाल
लाल, अपर जिलाधिकारी संतोष बहादुर, पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ शंकर मीना, अपर पुलिस अधीक्षक एलबीकेपाल, सीओ सिटी आलोक मिश्रा, इंसपेक्टर बलजीत सिंह आदि ने अंतिम दर्शन करते हुए शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रयागराज से आई सीआरपीएफ की टुकड़ी ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद फायरिंग करते हुए अंतिम सलामी ली। इस प्रक्रिया के बाद शहीद का पार्थिव शरीर फूलों से सजे ट्रक में लेकर अंतिम सफर शुरू किया गया। अंतिम सफर में हजारों लोगों का जनसमूह था। शहीद विकास के खेतों में ही विधि विधान और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। क्रियाकर्म शहीद के दादा दातादीन वर्मा ने किया जबकि मुखाग्नि शहीद के छोटे भाई विनय वर्मा ने दी। इनके अलावा शहीद विकास कुमार के अंतिम दर्शन और अंतिम यात्रा के दौरान राजनीतिक दलों के लोगों में राज्यसभा सांसद और सपा के राष्ट्रीय
पुष्प चक्र अर्पित करते पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ शंकर मीणा
महासचिव विशंभर प्रसाद निषाद, नरैनी विधायक राजकरन कबीर, सपा जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित, कांग्रेस नेता मुमताज अली, नगर पालिका अध्यक्ष मोहन साहू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बल्देव वर्मा, सपा नेता रामपाल प्रजापति, सपा के पूर्व जिला महासचिव राजेंद्र प्रसाद यादव और कुछ भाजपाई कार्यकर्ता मौजूद रहे। सदर विधायक, तिंदवारी विधायक और बबेरू विधायक या उनका कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। तिंदवारी के पूर्व विधायक वयोवृद्ध जगन्नाथ जरूर पहुंचे और उन्होंने शहीद को श्रद्धांजलि दी। 

हाइवे को कई घंटे पहले किया गया था वन-वे 

बांदा। बांदा-बहराइच स्टेट हाइवे पर ही शहीद विकास कुमार का गांव लामा स्थित है। यातायात व्यवस्था सुचारु
पुष्प चक्र अर्पित करते डीआईजी चित्रकूटधाम परिक्षेत्र दीपक कुमार
रूप से बनाए रखने के लिए ट्रैफिक पुलिस के द्वारा मंगलवार की दोपहर से ही हाइवे के कुछ हिस्से को वन-वे कर दिया गया था ताकि आवागमन में लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। शहीद को श्रद्धांजलि देने वाले अधिकारियों के वाहन हाइवे पर सड़क किनारे ही खड़े हुए थे। बुधवार की सुबह तो हाइवे पर सैकड़ों की संख्या में वाहन खड़े थे और पुलिस फोर्स भी तैनात थी ताकि हाइवे पर किसी प्रकार का हादसा न हो सके। बुधवार की दोपहर के बाद हाइवे को सुचारु रूप से शुरू कर दिया गया। 

सेवानिवृत्त सैनिकों ने दी अंतिम सलामी 

बांदा। बुधवार को अंतिम दर्शन के दौरान श्रद्धांजलि देने के लिए सेवानिवृत्त सैनिक भी पहुंचे और बाकायदा पुष्प
फूलों से सजाए गए ट्रक में शहीद का पार्थिव शरीर अंत्येष्टि स्थल ले जाते सेना के जवान और मौजूद हजारों लोगों का हुजूम
चक्र अर्पित करते हुए अंतिम सैल्यूट किया। इन पूर्व सैनिकों में सूबेदार मेजर एनके शुक्ला, सूबेदार डीसी श्रीवास्तव, कैप्टन एसबी सिंह राठौर, कैप्टन विश्राम सिंह, सूबेदार रामनरेश सिंह, सूबेदार मेजर रामबहादुर सिंह, सूबेदार मेजर डीएस तिवारी, हवलदार रामकुमार, सूबेदार मान सिंह, हवलदार रामलखन सिंह, हवलदर विष्णुदत्त, कैप्टन एलएस यादव आदि ने श्रद्धांजलि दी।

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