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बिनु सत्संग विवेक न होइ - योगेश गौड़

हमीरपुर, महेश अवस्थी । महात्मा योगेश गौड़ ने कहा कि मानव योनी हमे सत्कर्म करने के लिए मिली है। बिना अच्छी संगति के मनुष्य का स्वाभाव सत्कर्मी नही बन पाता। सत्संग उसे कहते है जहां सत्गुरू अपने शिष्यों को प्रभु के सर्व व्यापी अखण्ड स्वरूप का साक्षात्कार कराकर भक्तिमय सत्कर्मी जीवन जीने की प्रेरणा देते है वे संत निरंकारी मंडल द्वारा आयोजित सत्संग भवन कुछेछा में संत समागम में बोल रहे थे। उन्होने समझाया कि सत्गुरू निरंकारी माता सुदीक्षा, सविंदर, हरदेव की छत्र छाया में परमात्मा के सर्व व्यापी स्वरूप के साक्षात्कार करके सत्कर्मी जीवन को बिता रहे है। सभी को प्रभु की जीवित प्राणवंत मूर्ति मानना चाहिए। किसी को अपने से छोटी जाति का नही मानना चाहिए। हम जाति नस्ल, बुरी भाषा, पहनावा के भेदभाव को भूलकर प्रेममय निरंकारी
परिवार के सदस्य बनकर जीवन जी रहे है। अच्छे काम और प्राणिमात्र की सेवा ही हमारा लोक परलोक सुधारते हैै। दस लाख से अधिक निरंकारी मिशन के अनुयायी रक्त दान कर चुके है। स्वच्छता अभियान चलाकर स्वच्छ आत्मा, स्वच्छ तन और स्वच्छ प्रथ्वी के लक्ष्य की ओर बढ रहे है। भारत सहित सभी देशो में प्राकृतिक आपदा के समय निरंकारी मिशन के अनुयायी मानवता की सेवा कर दूसरो को भी करने की प्रेरणा देते है। कार्यक्रम में सुमेरपुर, मौदहा, राठ ,बिवांर ,ककरऊ, कुरारा के लोग बडी संख्या में शमिल हुए। संचालन जगदीश शंकर रामप्रकाश और नम्रता ने किया। मधुर भजनो से भक्तिरस से सभी को सरोबार कर दिया। विजय कुमार निगम रामनरेश अरविन्द साहू, राजबहादुर वर्मा, देवी गुलाम, वीके चक, राजपाल सिंह डा, सुशील कुमार ने सहयोग किया। 

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