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बाल अधिकारों को लेकर हुई राष्ट्रीय कार्यशाला

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरी । राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली के तत्वावधान में दीनदयाल शोध संस्थान के उद्यमिता विद्यापीठ परिसर में चल रही आकांक्षी जिलों के गैर सरकारी संगठनों की राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के चिन्हित आकांक्षी जिलों से आए प्रतिनिधियों के बीच बाल अधिकारों से संबंधित विषयों पर जिला सह समूह परिचर्चा रखी गई। इसके बाद पांच क्षेत्र जिसमें स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेशन एवं कौशल विकास, आधारभूत संरचना जो कि राष्ट्रीय बाल आयोग की निगरानी के तहत आते हैं उन विषयों पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा
तकनीकी सत्र के माध्यम से स्लाइड प्रस्तुतीकरण एवं लेक्चर के द्वारा मार्गदर्शन किया। राष्ट्रीय बाल आयोग की ओर से रिसोर्स पर्सन के रूप में तकनीकी सत्रों में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेटिक लीडरशिप के डिप्टी डीन रवि पोखरना, नीति आयोग के निदेशक एडीपी सौमित्र मंडल, सिक्किम राज्य के पूर्व मुख्य सचिव आलोक श्रीवास्तव, एफआईएसएस के निदेशक प्रदीप हजारिका, राष्ट्रीय बाल आयोग की अधिवक्ता डॉ मधुलिका शर्मा ने बताया कि इन चिन्हित जिलों में काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों ने बाल अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों को लाने का भरसक प्रयास किया है। इन जिलों में कार्य करने वाले स्वैच्छिक संगठन बदलाव के आंदोलन को तेज करने में एक प्रमुख भूमिका में उभरे हैं। यह संगठन सरकार द्वारा निर्धारित प्रावधानों और प्रभावित लोगों की जमीनी आवश्यकताओं के बीच के अंतर को पाटने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। कार्यशाला में दीनदयाल शोध संस्थान की कोर कमेटी के सदस्य बसंत पंडित एवं सचिव डॉ अशोक पांडे व कृषि विज्ञान केंद्र मझगवां सतना के वरिष्ठ वैज्ञानिक वेद प्रकाश सिंह, जन शिक्षण संस्थान के परियोजना अधिकारी राजेंद्र सिंह के द्वारा दीनदयाल शोध संस्थान के स्वावलंबन अभियान के मॉडल एवं ग्राम विकास के अपने अनुभवों को साझा किया। 

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