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आज के समाजवाद में क्या अंतर.......

देवेश प्रताप सिंह राठौर 
(वरिष्ठ पत्रकार)

समाजवाद के सिद्धांत से आप क्या समझते हैं आज से जाने का जरूरत है,आज के समाजवाद को जाने,
समाजवाद एक राजनीतिक और आर्थिक सिद्धांत है जो उत्पादन और संसाधनों के सामान्य स्वामित्व और सहकारी प्रबंधन पर जोर देता है,आधुनिक समाजवाद 18 वीं शताब्दी में औद्योगिकीकरण और असंतुलित निजी स्वामित्व के कारण असमानताओं से उत्पन्न हुआ। समाजवादी आम तौर पर इस दृष्टिकोण को मानते हैं कि पूंजीवाद स्वाभाविक रूप से शोषणकारी है।

समाजवादी सिद्धांत मुख्य रूप से नैतिक और सामाजिक मूल्यों पर आधारित है। यह संपत्ति और व्यवसाय में व्यक्तिगत और राज्य दोनों की स्वामित्व की बात करता है। स्वीडन और डेनमार्क गैरसमाजवादी के उदाहरण है जहाँ पर सरकार अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करती है एवं राज्य के सभी चीजों पर उन्हीं का स्वामित्व होता है।इसका यह अर्थ निकलता है कि समाजवाद पूंजीपतियों का विरोध करता है और इसका सिद्धांत पूर्ण रूप से समाज पर आधारित होता है।अर्थव्यवस्थाप्राचीन भारत
क्या अंग्रेजों से पहले का भारत पूंजीवादी था।
अंग्रेजी राज से ठीक पहले का समाज पूर्णतः पूँजीवादी न भी हो तो भी भारतीय व्यवस्था और आधुनिक पूँजीवादी समाजों में गाढ़ समानताएं हैं। दोनों - मुस्लिम और हिंदू राज में व्यवसायियों की समाज में गहरी पैठ थी और सदियों से व्यवसाय करना लोगों के जीवन की सबसे प्रमुख गतिविधि थी। श्रेणी (प्राचीन कॉरपोरेशन)आज का परिवेश ऐसा हो गया है कि मोबाईल हम सबके के लिए बहुत जरूरी हो गया है, आज ज्यादातर काम मोबाइल से आसानी से किये जा सकते हैं। हर चीज़ का दो परिणाम होता है अच्छा और बुरा अगर एक तरफ देखे तो मोबाईल से उपयोगी और काम की वस्तुओं का भरपूर लाभ उठाते हैं, वहीं दूसरी तरफ जब मोबाईल हमारे लिए एक अभिशाप बनने लगता है मोबाईल पे ज्यादा समय हम सोशल मीडिया पर बिताते हैं जिसका बहुत ही दुष्परिणामहैअर्थव्यवस्थाराजनीतिक्या समाजवाद आलस्य बढ़ाता ह जा रहा है
पहले इसके बारे में अच्छी तरह जान लीजिए फिर खुद ही समझ लीजिए की इसका सच क्या है भारत में समाजवाद न कभी आया और न ही आएगा इसलिए इसका कोई भी महत्व नहीं है आज हम अर्थव्यवस्था के प्रकार के बारे में पढ़ेंगे। देखिये पूरी दुनिया में लोग केवल धर्म, जाति, रंग या क्षेत्र के आधार पर ही नहीं बँटे हुए हैं, बल्कि एक आधार और है। और वह है विचारधारा। तथा आज की विचारधारा के आधार पर ही अर्थव्यवस्था कोबांवनवा लोग कौन-कौन उनमें से टॉप के  लेखक इस प्रकार हो सकते हैं.  .श्री नरेश कुमार शास्त्रीजी. श्री मुकेश तिवारीजी  श्री विजय कुमार   श्रीमती कमला परगई जी. श्री कपिल चौहानजी, श्री पवन राहुलजी आचार्य श्यामजी . श्री विनोद सिंह जी . श्री नरेश शर्माजी और श्री परमानन्द द्विवेअर्थव्यवस्थासमाजवाद
"जो होता है अच्छे के लिए ही होता है फिर चाहे वह कुछ भी हो जाए"इस पंक्ति पर आपका क्या विचार है नरेश कुमारशास्त्री 
नरेश कुमार शास्त्रीइस पंक्ति को संघर्ष शून्य लोग प्रयोग किया करते थे, हम लगे हैं ईश्वर जो करेंगे वह होगा। हम खड़े हैं कोबरा आया काटा यही होनी थी नहीं बचाव करने के बाद, पूरा मेहनत के बाद फल नहीं मिले यह नहीं होता।

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