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महाशिव रात्रि 21 फरवरी

महाशिव रात्रि व्रत का पालन फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को किया जाता है। इस बार यह पावन पर्व 21 फरवरी को मनाया जाएगा। 21 फरवर्री  शुक्रवार होने से इस बार महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। इस साल महाशिवरात्रि 21 फरवरी  को शाम को 5रू20  से शुरू होकर अगले दिन यानी 22 फरवरी दिन शनिवार को शाम 7रू02 तक रहेगी।  महाशिवरात्रि पर लगभग 59 साल बाद विशेष योग बन रहा है, जो साधना-सिद्धि के लिए शश योग है। इस दिन पांच ग्रहों की राशि पुनरावृत्ति भी होगी। शनि व चंद्र मकर राशि, गुरु धनु राशि, बुध कुंभ राशि तथा शुक्र मीन राशि में रहेंगे। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का विवाह माता पार्वती के साथ हुआ था। इसलिए इस दिन उनके विवाह का उत्सव मनाया जाता है  भगवान शिव कल्याण करने वाले औढरदानी
कहलाते है। ये शीघ्र प्रसन्न हो जाते है। यह व्रत सभी वर्णो की स्त्री- पुरूश और बाल, युवा, वृद्ध के लिए मान्य है। शिवरात्रि व्रत सब पापों का शमन करने वाला है। इससे सदा सर्वदा भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शिव पूजन में स्नान के उपरान्त शिवलिंग का अभिशेक जल, दूध,दही घृत, मधु, शर्करा (पंचामृत) गन्ने का रस चन्दन, अक्षत, पुश्पमाला, बिल्व पत्र, भांग, धतूरा इत्यादि  द्रव्यों से अभिशेक विशेश मनोकामनापूर्ति हेतु किया जाता है एवं ‘‘ऊँ नमः शिवाय’’ मंत्र का जाप करना चाहिए। शिवरात्रि में प्रातः एवं रात्रि में  चार प्रहर की शिव पूजन का विशेश महत्व है। 
चार प्रहार की पूजा प्रारम्भ समय-प्र्रथम प्रहर सायंकाल 06ः02, द्वितीय प्रहर रात्रि 09ः11, तृतीय प्रहर मध्यरात्रि 12ः20 से चतुर्थ प्रहर प्रातः 03ः29 से प्रारम्भ होगा। निशिथ काल पूजा समय- रात 11ः55 से रात 12ः45 तक। महाशिव रात्रि पर शिव अराधना से प्रत्येक क्षेत्र में विजय, रोग मुक्ति, अकाल मृत्यु से मुक्ति, गृहस्थ जीवन सुखमय, धन की प्राप्ति, विवाह बाधा निवारण, संतान सुख, शत्रु नाश, मोक्ष प्राप्ति और सभी मनोरथ पूर्ण होते ह्रै कुंडली में अशुभ ग्रह शान्त होते है। महाशिवरात्रि कालसर्पदोष, पितृदोष शान्ति का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। जिन व्यक्तियों को कालसर्पदोष है उन्हें 8 और 9 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से लाभ मिलता है । 

राशि अनुसार अभिषेक

 1. मेष- शहद और गन्ने का रस 
 2. वृषभ- दुग्ध, दही 
3. मिथुन- दूर्वा से 
4. कर्क- दुग्ध, शहद 
5. सिंह- शहद, गन्ने के रस से 
6. कन्या- दूर्वा एवं दही 
7. तुला- दुग्ध, दही  
8. वृश्चिक- गन्ने का रस, शहद, दुग्ध 
9. धनु- दुग्ध, शहद  
10. मकर- गंगा जल में गुड़ डालकर मीठे रस से 
11. कुंभ- दही से  
12. मीन- दुग्ध, शहद, गन्ने का रस

मनोकामनाएं के लिए  

वाहन सुख के लिए  चमेली का फूल चढ़ाएं.   
लक्ष्मी  कृपा के लिए कमल का फूल,  अखंडित चावल चढ़ाएं 
विवाह  के लिए जल में केसर  बेला के फूल  अर्पित करें. .    
संतान प्राप्ति के लिए धतुरे का  फूल, धतूरा  चढ़ाएं 
अपार अन्न-धन के लिए जूही के फूल पर      
पद, सम्मान अगस्त्य के फूल 
वस्त्र-आभूषण  के लिए कनेर के फूल    
लंबी आयु के लिए दुर्वाओं से शिव पूजन करें
सुख-शांति और मोक्ष के लिए  सफेद कमल के फूल   
बीमारियों रोग नाश के लिए  पानी में दूध और काले तिल 

ज्योतिषाचार्य एस. एस. नागपाल,  स्वास्तिक ज्योतिष केन्द, अलीगंज

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