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Sunday, February 9, 2020

घर-घर 17 फरवरी से खिलाई जाएगी फाइलेरिया की दवा

दवा खिलाते वक्त कर्मचारी सहज रखें अपना व्यवहार: डीएम 
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई अंतर्विभागीय बैठक

बांदा, कृपाशंकर दुबे । फाइलेरिया के कारण व्यक्ति आजीवन पीड़ा का शिकार हो सकता है, इसलिए जनपद में फाइलेरिया रोग के खात्मे को प्राथमिकता दी जाए। दवा खिलाते समय कर्मचारी अपना व्यवहार सहज रखें और लोगों को फाइलेरिया से होने वाली आजीवन पीड़ा के बारे में जानकारी दें जिससे अधिक से अधिक लोग दवा का सेवन करें। स्वास्थ्य विभाग दूसरे विभागों के साथ बेहतर समन्वय में काम करे और उचित प्रचार-प्रसार कर लोगों को फाइलेरिया के बारे में जागरुक किया जाए। ये निर्देश जिलाधिकारी हीरालाल ने आज रविवार को कलेक्ट्रेट कैंप कार्यालय में आयोजित फाइलेरिया अभियान की अन्तर्विभागीय समन्वय समिति की बैठक में दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि योग हर बीमारी की दवा है, नियमित योग करने से कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। इसलिए सभी लोग रोग से बचाव की ओर बढें, स्वस्थ जीवनशैली और योग को नियमित रूप से अपनाएं जिससे बीमारियों का बोझ कम हो सके। हर बैठक की तरह इस बैठक में भी उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के सभी कर्मचारियों को योग करने और अन्य लोगों को योग अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।  
फाइलेरिया की रोकथाम के लिए जिले में 17 से 29 फरवरी तक सामूहिक दवा सेवन यानि मास ड्रग एडमिनिस्ट्रीएशन (एमडीए) अभियान शुरू होने वाला है जिसके तहत घर-घर सर्वे कर फाइलेरिया की दवा मुफ्त खिलाई जाएगी। 
स्वास्थ्य कर्मचारियों को संबोधित करते अधिकारी
जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार ने बताया कि अभियान को लेकर जिला और ब्लॉक स्तर पर तैयारियाँ कर ली गई हैं। दवा खिलाने के लिए जनपद में कुल 2045773 जनसँख्या का लक्ष्य रखा गया है। आयु के अनुसार अलग-अलग वर्ग को दवा का निर्धारित डोज दिया जाएगा। 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को दवा का सेवन नहीं कराया जाएगा। 1 से 15 फरवरी तक जनपद के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के 8 स्थानों पर कराए गए रात्रिकालीन सर्वे के दौरान 4230 रक्त पट्टिकाएं बनाई गई थी जिनकी जांच के बाद 48 घनात्मक रोगी पाए गए हैं। इन सभी को भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि हांलाकि डी.ई.सी. (डाईइथाइल कार्बामाजीन साइट्रेट) गोली फाइलेरिया की अति सुरक्षित दवा है। पर जिस व्यक्ति में फाइलेरिया का पैरासाइट पाया जाता है उसमें दवा का क्षणिक प्रतिकूल प्रभाव हो सकता है। ऐसे में समस्त सुपरवाईजरों के पास एंटी-एलर्जिक दवा उपलब्ध रहेगी। इसके साथ ही इससे निपटने के लिए समस्त स्वास्थ्य इकाइयों पर रैपिड रेस्पोंस टीमों का गठन भी कर लिया गया है। बैठक में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व नोडल डा. आरएन प्रसाद, सहायक मलेरिया अधिकारी लाल साहब सिंह, वीबीडी सलाहकार प्रदीप कुशवाहा, बायोलॉजिस्ट भावना शर्मा, आईसीडीएस व जिला पंचायती राज  के प्रतिनिधि, पीसीआई, वनांगना, प्रोजेक्ट अक्षय, अल्फिजा, सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च आदि संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल रहे।     

एमडीए के लिए आशा, एएनएम व अंगनवाडियों को दिया प्रशिक्षण 

बांदा। अभियान के तहत जनपद में प्रति 1250 लाभार्थियों व 250 घरों पर एक दो सदस्यीय टीम का गठन किया गया है जो घर-घर जाकर दवा खाने के कार्य करेगी। इस प्रकार दवा वितरण हेतु कुल 2894 दवा वितरकों को लगाया गया है। निगरानी के लिए 306 सुपरवाईजरों को भी लगाया गया है। इसके लिए 6 और 7 फरवरी को समस्त आंगनवाड़ी, आंगनवाड़ी सहायिकाओं, एएनएम, आशाओं और स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी सभागार में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें दवा खिलाने के तरीके और फाइलेरिया के प्रति लोगों को जागरूक करने के बारे में जानकारी दी गई। 

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