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नेत्रदान से महान दूसरा कोई परमार्थिक कार्य नही - डा0 बी0 के0 जैन

चित्रकूट, ललित किशोर त्रिपाठी ।  नेत्रदान से महान दूसरा कोई परमार्थिक कार्य हो ही नही सकता है। यह बात सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के निदेशक डा0 बी0 के0 जैन ने कही । उन्होने बताया कि मनुष्य की मृत्यु के पश्चात शरीर का हर अंग निष्क्रिय हो जाता है, केवल आॅंख ही ऐसा अंग है जो जीवित रहती है। यदि एक व्यक्ति ने मरने के बाद अपनी आॅंख दान दे दी है तो दो अन्धे लोगों के अंधकारमय जीवन में उजाला आ सकता है । नेत्रदान को सभी धर्माें ने स्वीकार किया है । कोई भी स्त्री, पुरुष किसी भी जाति या धर्म के लोग नेत्रदान कर सकते हैं, इसमें उम्र का कोई बंधन नहीं है । नेत्रदान चश्मा पहनने वाले, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, दमा के मरीज, मोतियाबिन्द के आॅपरेशन वाले लोग भी यह  दान कर सकते हैं । उन्होने यह भी बताया कि मृत्यु के छः घंटे के अन्दर आॅंखें ले लेनी चाहिए और जितनी जल्दी आॅख लगा दी जाएगी उसका परिणाम भी उतना ही अच्छा होगा । इसलिये नजदीक के नेत्र बैंक में चार घंटे के अन्दर फोन कर देना चाहिए । दान की गयी आॅंखें कभी भी खरीदी या बेंची नहीं जा सकती है । ईश्वर की दी हुयी यह अनमोल भेंट है इसे बहुत ही संभाल कर रखना चाहिए।
मरने के बाद भी इसे नष्ट न होने देकर पुनः उपयोग के लिए नेत्रदान करने में ही समझदारी है । इससे किसी अन्धे व्यक्ति के जीवन में खुशियाॅं भरी जा सकती हैं। आज नेत्रदान के महत्व को समझकर कर्वी के श्रीमती ज्योति करवरिया के नेतृत्व में श्री राजा करवरिया, श्री रतन पटेल, श्रीमती सरस्वती सोनी, श्री अजय रिछारिया, श्रीमती रंजना खरे, श्रीमती अल्पना सोनी सहित अनकों समाजसेवीयों ने चिकित्सालय आकर आई बैंक के बारे में जानकारी हासिल की। सबसे बडी खुशी की बात यह थी कि नेत्रदान के महत्व को समझने में महिलाओं ने उत्सुकता दिखाई। इन सभी लोगों ने आज चिकित्सालय में नेत्रदान के लिये संकल्प पत्र भरकर चिकित्सालय के निदेशक डा0 बी0 के0 जैन को सौंपा। साथ ही इस मुहिम को आगे बढाने का संकल्प लिया। डा0 जैन ने कहा कि ऐसी अमूल्य चीज जो किसी के जीवन में प्रकाश ला सकती है उसे आप कितनी आसानी से बिना सोचे समझे शमशान में जलाकर नष्ट कर देते हैं । इस महान कार्य में सभी का सहयोग चाहिए, लोगों में जागरुकता की कमी के कारण इस अमूल्य निधि को सहज ही में नष्ट कर देते हैं। इसलिए इसका प्रचार हर गली मोहल्ले में करना चाहिए, जिससे बिना जानकारी के यह अनहोनी न होने पाये । डा0 बी0 के0 जैन ने यह भी कहा कि जितना बात करने में सहज लग रहा है उतना आसान नहीं है क्यों कि मृत्यु के माहौल के बारे में आप सभी जानते हैं उस समय किसी को नेत्रदान के लिये कहना बडी टेढी खीर है इस कठिन कार्य को अंजाम देने का काम आप जैसे प्रबुद्ध समाजसेवी ही कर सकते हैं। उस गमगीन माहौल में कोई साहसी व्यक्ति ही इस काम के लिये प्रेरित कर सकता है जो इसका महत्व समझता है। कार्य कठिन है इसीलिये करने योग्य है सरल काम तो सभी लोग करते हैं।  डा0 जैन ने सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया है और इस कार्य में सभी समाज सेवी संगठनों, मीडिया के लोगों से अपेक्षा की है कि नेत्रदान के महत्व को समझाकर लोगों को जागरुक करें।  

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