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निजी साधनों से रामसखी ने बनायी समृद्धि की राह

120 बकरियां व 45 बच्चों की परिवर्रिश कर चलाती है घर का खर्च

हमीरपुर, महेश अवस्थी । कुरारा विकासखण्ड के रघवा गांव की गैर पढ़ी-लिखी महिला ने बिना सरकारी मदद के बकरी पालन कर परिवार को खुशहाल किया है। यह व्यवसाय उसके लिये रोजगार का साधन बन चुका है। महिला के इस कार्य की जानकारी जब पशुपालन विभाग को हुई तो पूर्व प्रधान चैधरी चरन सिंह के जन्म दिन पर 23 दिसम्बर को उसे हमीरपुर मुख्यालय बुलाकर महिला डिग्री काॅलेज में बुलाकर सम्मानित किया। रघवा गांव की रामसखी बताती है कि उसे सरकारी योजनाओं की कोई जानकारी नहीं है। व्यक्तिगत् रूप से उसने 15 बकरियां खरीदने के बाद उनसे 120 बकरियां तैयार की। अब पैदा होने वाले बकरों को बेंचकर वह आठ लोगों
का परिवार चला रही है। उसके पास सिर्फ दो बीघा जमीन है। केन्द्र और प्रदेश सरकार के तमाम योजनायें संचालित हैं, मगर अधिकारियों की निगाहें इस महिला पर नहीं पड़ी। रामसखी का कहना है कि वह रातदिन इनकी सेवा में रहती है। खेतों में जाकर चराती है। इस समय उसके पास 120 बकरी और उनके 145 बच्चे हैं। उसने बताया कि बकरा 7 से 10 हजार रुपये का बिकता है जिससे परिवार का खर्च चलता है। बकरियों को रखने के लिये उसने एक बड़ा बाड़ा बनवाया है। पशु चिकित्साधिकारी डाॅ अभिताभ सचान ने कहा कि रामसखी ने निजी संसाधनों से अच्छी आमदनी कर परिवार की गाड़ी चला रही है। वह लोगों के लिये मिशाल है। इसी के चलते उसे इस बार सम्मानित किया गया है। इधर रामसखी ने 10 बीघे जमीन बटाई में ले ली है। ताकि इन जानवरों के खाने, पीने की व्यवस्था हो सके। उसके इस काम मे ंउसका पति भोला भी हांथ बटाता है।

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