योजनाओं की तलाश में भटक कर वृद्धा ने विकास भवन को बनाया आशियाना - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Advt.

Advt.

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Wednesday, January 15, 2020

योजनाओं की तलाश में भटक कर वृद्धा ने विकास भवन को बनाया आशियाना

लोक भवन से लेकर विकास भवन तक सैकड़ो योजनाए फिर भी पात्र वंचित
अंतिम पायदान तक योजनाओ के लाभ का दावा बेमायने

फतेहपुर, शमशाद खान । शासन बदला सत्ता बदली नहीं बदली तो गरीबो की तकदीर। गरीबों के कल्याण के लिये लखनऊ स्थित लोक भवन से लेकर जनपद के विकास भवन तक योजनाओं की भरमार भले ही हो लेकिन समाज के अंतिम पायदान पर बैठे गरीब को योजनाओं का लाभ दिलाये जाने का केंद्र एवं प्रदेश सरकार के दावे के विपरीत सरकार की जमीनी योजनाओ की हकीकत का अंदाजा विकास भवन के सभागार के दरवाजे पर बैठी वृद्धा को देखकर इस बात से लगाया जा सकता है कि आज भी गरीब कमजोर सरकार की योजनाओ के
विकास भवन में डेरा जमाये वृद्ध महिला।
लाभ से वंचित ही है। सरकार से मदद की उम्मीद लेकर शासन की योजनाओं का लाभ की उम्मीद लगाकर बेसहारा लगभग 70 वर्षीय वृद्ध जो मुश्किल से ही चल फिर सकती है। अपना नाम पता भले ही बताने में भी असमर्थ है। योजनाओ को ढूंढते ढूंढते आश्रय लेने के लिये उसी विकास भवन में ही पहुंच गयी। जहाँ से गरीबो के उत्थान के लिये योजनाएं बनाई व चलाई जाती है। बूढ़ी बीमार और ठंड से ठिठुरती वृद्ध महिला को देखकर आस-पास एवं उधर से गुजरने वाले लोगों ने ठंड से बचने के लिये उसे कम्बल व अन्य गर्म कपड़े देने के साथ ही खाने की वस्तुएं दी लेकिन एक सवाल जो जनमानस के दिमाग मे घर कर रहा है कि कहां है सरकार की गुड़ गवेर्नेर्स, कहां है सरकारी योजनाओं को जमीन पर लागू करने वाले सिस्टम के सक्षम अधिकारी। आखिर पात्र होने के बाद भी ऐसे बेसहारा को बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर न करा सके। मांग कर खाना व सड़कों पर गुजारा करने वालों की सुधि आखिर कौन लेगा। सरकार द्वारा सन्चालित आश्रय गृह हो या फिर सरकार की योजनाएं शायद गरीबो के लिये सफेद हाथी ही है। गरीब कल भी योजनाओ से वंचित था और आज भी।

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages