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नेताजी ने ‘‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा’’ का दिया था नारा

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयन्ती पर विशेष 

फतेहपुर, शमशाद खान । ‘‘तुम मुझे खून दो मै तुम्हे आजादी दूॅगा’’ का क्रान्तिकारी उद्घोष करने वाले नेता जी सुभाष चन्द्र बोस को आज सारा राष्ट्र नमन कर रहा है। जब सम्पूर्ण विश्व बरतानिया हुकूमत के खिलाफ दो भागों में विभक्त होकर युद्ध कर रहा था उस समय द्वितीय विश्व युद्ध में देश को आजाद कराने के लिए अंग्रेजी फौजों के खिलाफ आजाद हिन्दी फौज की स्थापना कर देश के युवक-युवतियों को सैनिक बनाकर अंग्रेजी सेनाओं के छक्के छुड़ाने में किसी भी प्रकार की कसर नही छोड़ी थी। उनके त्याग और बलिदान का स्मरण कर सम्पूर्ण देशवासियों के मन-मष्तिस्क में देश-प्रेम की ऊर्जा का संचार होता है, परन्तु इस महान क्रान्तिकारी के त्याग और बलिदान का देश के हुक्मरानों ने कितना सम्मान दिया यह तो इसी बात से स्पष्ट हो जाता है कि आज भी उनकी मृत्यु का रहस्य मात्र रहस्य ही बना है। नेता जी सुभाष चन्द्र बोस गरीबों, मजदूरों के सच्चे हितैषी थे। 
नेताजी सुभाषचन्द्र बोस।  
सर्वप्रथम सन् 1928 में टाटा स्टील कम्पनी द्वारा मजदूरों के साथ उत्पीड़न और अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर मजदूरों की यूनियन का गठन किया और हड़ताल करवायी। उनकी मांगों पर मजदूरों का वेतन और बोनस देने के लिए जहां कम्पनी तैयार हुई। वहीं कम्पनी के भारतीय जनरल मैनेजर की भी नियुक्ति की गयी। इससे पूर्व कम्पनी में कोई भी भारतीय मैनेजर नही रहे। टाटा स्टील कम्पनी में मजदूरों की आवाज बुलंद करने के बाद देश की आजादी आंदोलन में जुड़ गये और कांग्रेस के सच्चे सिपाही के रूप में अखिल भारतीय कांग्रेस के वह अध्यक्ष भी चुने गये, परन्तु जवाहरलाल नेहरू से वैचारिक मतभेद होने के कारण उन्हें कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा। जापान के सहयोग से ब्रिटेन के सहयोग में द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल देशों के विरूद्ध आजाद हिन्द फौज की सेना के जरिये युद्ध किया। देश के हजारों नौजवान युवक-युवतियों ने आजाद हिन्द फौज में शामिल होकर नेता जी द्वारा दिये गये नारे तुम मुझे खून दो मै तुम्हे आजादी दूॅगा से प्रेरित होकर मर-मिटने के लिए तैयार थे। नेता जी की फौज में हिन्दू-मुस्लिम, सिख-इसाई हर धर्म और हर वर्ग के लोग शामिल होकर देश को विदेशी हुक्मरानों से आजाद कराने के लिए लड़ाई लड़ी जिसमें अंग्रेजी हुक्मरानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। देश की आजादी में सर्वस्व निछावर करने वाले नेता जी के 123 वें जन्म दिवस पर सभी देशवासी उन्हें नमन कर रहे है। 

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