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उरई-ऐर दस किमी संपर्क मार्ग से डामर, गिट्टी गायब

दोपहिया बाहन फिसलकर हो जाते है चोटिहाल

कुसमिलिया (उरई), अजय मिश्रा । शासन प्रशासन भले ही सड़कों के गड्ढामुक्त होने का दावा करते हों मगर उरई से ददरी मार्ग की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। उरई से लेकर ऐर तक गड्ढे ही हैं सड़क का पता नहीं है। बारिश के पानी से पूरी सड़क पर सिर्फ कीचड़ ही नजर आ रहा है जिसमें फिसलकर पैदल राहगीर और दो पहिया वाहन चालक घायल हो रहे हैं मगर लगता है कि विभाग के अधिकारी किसी बडे़ हादसे के इंतजार में हैं।
उरई-दादरी मार्ग पर उरई से लेकर ऐर तक का 10 किलोमीटर लंबा मार्ग गड्ढों, कीचड़, धूल, मिट्टी, से भरा पड़ा है जिससे इस मार्ग पर वाहनों से यात्रा करना भी दुश्वार हो गया है। वाहनों की टूट फूट के साथ घायल होने का खतरा उठाते हुए यात्रा पूरी करना इस मार्ग से गुजरने वालों की मजबूरी है। अभी तक इस मार्ग पर गिर और
कीचड़ से अटी पड़ी सड़क।
फिसलकर एक दर्जन से अधिक यात्री घायल हो चुके हैं मगर इस मार्ग की मरम्मत की पहल नहीं हुई है। आए दिन दोपहिया, चार पहिया वाहन गड्ढों में फंसकर पलट रहे हैं। वही बडे़ वाहनों के गड्ढों में फंसकर खराब हो जाने पर यहां अक्सर  जाम लग जाता है और आवागमन भी बंद हो जाता है। क्षेत्रीय ग्रामीण  रहीश खान, महेश, लाखन, धर्मेंद्र, पप्पू, अनीश, शुगर, मटरू, प्रेमचंद सोनी दादरी रवि राजपूत, खरका, दीपक राजपूत खरका आदि का कहना है कि इस मार्ग के गड्ढों से वाहनों में टूट फूट और समय की बर्बादी के साथ कीचड़ व धूल से कपडे़ भी खराब हो जाते हैं। कई बार लोग गिरकर चुटहिल हो जाते हैं मगर जनप्रतिनिधि प्रशासन, पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारी इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।  आखिर क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही हैं वही इमरजेंसी मरीज को भी मुख्यालय तक ले जाने में परेशानी उठानी पड़ती है। लोगों ने इस मार्ग जल्द से जल्द दुरुस्त कराए जाने की मांग की है।

कई बार आश्वासन के बाद भी नहीं सुधरी हालत
कुसमिलिया। प्रेमचंद सोनी दादरी के मुताबिक हर सरकार ने रोड बनबाने का वादा किया। कई बार शासन व जनप्रतिनिधियों से आश्वासन के बाद भी सड़क की दुर्दशा को नही सुधार गया है। देखते हैं कि कब मिट्टी में तब्दील हो चुकी रोड को डामर कब नसीब होता है।

ग्रामीणों के चुनाव बहिष्कार भी नहीं बनवा पाई सड़क
कुसमिलिया। दीपक राजपूत खरका बताते हैं की इस क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों के लोग सड़क की मांग को लेकर दो बार चुनाव का बहिष्कार कर चुके हैं मगर इसका फायदा ग्रामीणों को नहीं मिला है।

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