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भाकपा ने ग्रामीण भारत बंद व हड़ताल के समर्थन में दिया धरना

राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा 
नागरिक संशोधन बिल को तत्काल वापस लेने की मांग 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने बुधवार को अशोक स्तंभ तले ग्रामीण भारत बंद और ट्रेन यूनियनों द्वारा की गई महा हड़ताल का समर्थन किया। समर्थन के लिए धरना भी दिया। धरने के दौरान भाकपा ने नागरिक संशोधन बिल को तत्काल वापस लिए जाने और अन्य मांगों को पूरा किए जाने की मांग की है। बाद में कलेक्ट्रेट पहुंचकर भाकपा ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भी सौंपा। 
कलेक्ट्रेट में ज्ञापन देने आए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता 
सीपीआई, सीपीआई माले, निर्माण मजदूर यूनियन, किसान सभा, कताई मिल मजदूर मोर्चा, स्टूडेंट फेडरेशन व लोकतांत्रिक जनता दल के संयुक्त तत्वावधान में ग्रामीण भारत बंद और ट्रेड यूनियनों द्वारा की गई महा हड़ताल का समर्थन करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पदाधिकारियों ने अशोक स्तंभ तले धरना दिया। धरने के दौरान नागरिक संशोधन बिल को तत्काल वापस लिए जाने की मांग की गई। इसके साथ ही न्यूनतम मजदूरी 21 हजार रुपए किए जाने, किसानों के उत्पादन के लागत मूल्य का डेढ़ गुना दाम दिए जाने, किसानों के समस्त कर्जे माफ किए जाने, जेएनयू में फैलाई गई हिंसा की न्यायिक जांच कराई जाने और दोषियों को कड़ी सजा दिए जाने, मनरेगा मजदूरों को 300 दिनों के काम की गारंटी व 400 रुपए दैनिक मजदूरी दिलाने, सार्वजनिक संस्थाओं का निजीकरण रोके जाने, शिखा चिकित्सा के व्यवसायीकरण को रोकने, बांदा की कताई मिल और बरगढ़ ग्लास फैक्ट्री चालू कराए जाने के अलावा औद्योगिक संबंध कोड बिल वापस लिए जाने तथा श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए 1926 से 1947 तक बने कानूनों को बहाल रखे जाने की मांग की गई। 10 सूत्रीय राष्ट्रपति को संबोधित मांगों का ज्ञापन भाकपा ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अधिकारियों को सौंपा। इस मौके पर रामप्रवेश यादव, हरीमोहन गुप्ता, श्यामसुंदर राजपूत, मदन भाई, नरेंद्र यादव, सधारीलाल, विद्यानंद शुक्ला, जयकरण प्रजापति, रामचंद्र सरस, देवीदयाल, गुड़िया, बुधराज सिंह, बब्बू खां, राजबहादुर वर्मा, चंद्रशेखर वर्मा, मैकू, रीवंद्र कुमार, रामस्वरूप, शैलेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे। 

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