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विश्व में भारत का अध्यात्मिक झण्डा फहराया स्वामी विवेकानन्द ने: पीडी दीक्षित

भारत के पुर्न जागरण में स्वामी जी योगदान: डाॅ भवानीदीन

हमीरपुर, महेश अवस्थी । वरष्ठि पत्रकार महेश अवस्थी ने कहा कि युवाओं को स्वामी विवेकानन्द के आदर्शों पर चलना चाहिये। उनके बताये रास्ते उठो, जागो और लक्ष्य की प्राप्ति होने तक रूको नहीं। वे समर्थ फाउण्डेशन


और इम्पैक्ट द्वारा स्वामी विवेकानन्द के जयन्ती पर बोल रहे थे। जिसमें 70 बालिका और महिलाओं ने भागीदारी की। जिला प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष पीडी दीक्षित ने कहा कि युवाओं के प्रेरणाश्रोत स्वामी विवेकानन्द को हम कोटि-कोटि नमन करते हैं और उनके बताये रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं। इम्पेक्ट ट्रेनिंग आॅफिसर सुरेन्द्र मिश्रा ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द हब सबके लिये अनुकरणीय हैं। उनके पदचिन्हों पर चलना हम सबके लिये गौरवमयी है। समर्थ फाउण्डेशन के देवेन्द्र गांधी ने कहा कि स्वामी जी ने जिस तरह पूरे विश्व में भारत के सोंच का झण्डा फहराया वे हम सबके अध्यात्मिक गुरू हैं। यहां अनुदेशिकायें, सुपरवाईजर, प्रमुख रूप से मौजूद रहीं।

केबी शिवहरे महाविद्यालय सिसोलर में प्राचार्य डाॅ भवानीदीन ने कहो कि स्वामी विवेकानन्द युवा हृदय सम्राट थे। अध्यात्मिक जगत में उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता। भारत में महिला और गरिमा के एक नये युग का उन्होंने सूत्रपात किया गया। वे स्वामी विवेकानन्द पर आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र अपने मित्रों को दक्षिणेश्वर में रामकृष्ण परमहंस से मिले। 25 वर्ष की उम्र में उन्होंने घर का त्याग कर सन्यास ले लिया था। उनके अध्यात्मिक और तेजस्वी व्यक्तित्व से प्रभावित होकर स्वामी जी ने उन्हें अपना शिष्य बना लिया। बाद में रामकृष्ण मिशन की स्थापना उन्होंने ने ही की थी। स्वामी जी ने भारत के युवाओं को कहा था कि उठो, जागे और तब तक रूको नहीं जब तक लक्ष्य न मिल जाये। भारत के पुर्न जागरण में विवेकानन्द का अपकृतिक योगदान था। 

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