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मरुस्थल में भी उद्यान खिला सकते हैं.......

काव्य गोष्ठी में कवियों ने बांधा समां

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। भारतीय साहित्यिक संस्थान के तत्वावधान में एसडीएम कालोनी स्थित भाभा पब्लिक स्कूल में मासिक काव्य गोष्ठी संपन्न हुई। जिसकी अध्यक्षता संस्था के वरिष्ठ सदस्य डा वीरेन्द्र प्रताप सिंह भ्रमर ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं संस्थापक देशराज पाण्डेय की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। संगीत शिक्षक वैभव जेजुल्कर ने वंदना प्रस्तुति दी। इस दौरान संस्था के सक्रिय सदस्य व विकलांग विवि के हिन्दी प्रवक्ता पियूष द्विवेदी को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त होने पर अंगवस्त्र से सम्मानित किया गया। काव्य पाठ

की श्रंखला में श्रीनारायण तिवारी ने कोशिश से ढहते मुश्किल का किला, ये मरुस्थल में भी उद्यान खिला सकते हैं प्रस्तुत किया। संदीप श्रीवास्तव ने अगर सितम ढाने आई ढाने दो, आंधी का रास्ता मत रोको आने दो, शशि यादव ने जहां पर देव दर्शन हो, वहीं भगवान होता है, जहां ऋषियों की वाणी हो वहीं उत्थान होता है सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरी। हास्य कवि शिवपूजन ने हमारी चेतना में ही प्रभु का अंश रहता है, किसी में कृष्ण रहते हैं, किसी में कंस रहता है सुनाया। वीेरेन्द्र प्रताप सिंह भ्रमर ने झांक रहे हैं मन में सपने, निर्मल नेह निरख नैनामृत, जाग उठा मन में अपनापन, पलको की कोमल छाया में, कैसा है अदभुद परिवर्तन, पियूष द्विवेदी ने ख्वाब करे हम अपने पूरे, साल नया है सुनाकर श्रोताओं का मन जीता। इस दौरान सर्वोदय सेवा आश्रम के अभिमन्यु ने नदियों पर विचार प्रकट किया। संचालन संस्था के डा मनोज द्विवेदी ने अतिथियों के प्रति आभार जताया। इस मौके पर प्रयाग नारायण अग्रवाल, दिनेश सिंह चैहान, प्रियंक प्रियदर्शन, रामलाल प्राणेश आदि मौजूद रहे।

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