Latest News

राष्ट्रीय फाइलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम

फाइलेरिया रोकथाम के लिए 17 फरवरी से चलेगा अभियान 
सामूहिक दवा सेवन के जरिये होगा फाइलेरिया पर वार  
हाथीपांव के नाम से भी जाना जाता है रोग को
जिला व ब्लाक स्तरीय अधिकारियों को दिया प्रशिक्षण   

बांदा, कृपाशंकर दुबे । फाइलेरिया की रोकथाम के लिए जिले में 17 से 29 फरवरी तक सामूहिक दवा सेवन यानि मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान चलेगा। इसके तहत मलेरिया विभाग की ओर से घर-घर सर्वे कर फाइलेरिया की दवा मुफ्त खिलाई जाएगी। इस संबंध में शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में
 प्रशिक्षण के दौरान मंचासीन अधिकारी
एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. संतोष कुमार द्वारा की गई। कार्यक्रम के दौरान नोडल अधिकारी डा. आरएन प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है, जिसे सामान्यतः हाथी पांव के नाम से भी जाना जाता है। इसके मच्छर अधिकतर गंदगी में पनपते हैं। अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें शहरी और ग्रामीण इलाकों में घर-घर जाकर रक्त पट्टिका बनाकर खून की जांच करेंगी और संभावित मरीजों को डीईसी और एल्बेण्डाजोल की गोली देंगी, जिसकी मात्रा आयु के आधार पर निर्धारित है। इसके साथ ही लोगों को जागरुक किया जाएगा कि वह अपने घर और आस-पास मच्छरों को पनपने न दें, साफ-सफाई रखें, सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें, ताकि इस बीमारी की चपेट में आने से बच सकें। 2 से 5 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी और एल्बेण्डाजोल की 1-1 गोली, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की 2 और एल्बेण्डाजोल की 1 गोली जबकि 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को डीईसी की 3 और एल्बेण्डाजोल की एक गोली दी जाएगी। दो साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रोगियों को यह दवा नहीं खिलायी जाएगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने निर्देश दिए कि दवाओं का सेवन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की निगरानी में कराया जाए और कोई भी परेशानी आने पर रैपिड रेस्पोंस टीम से संपर्क किया जाए। कार्यक्रम में जिला पंचायती राज अधिकारी, विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी समस्त मलेरिया फाइलेरिया निरीक्षक तथा ब्लाक स्तर के स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, फाइलेरिया इंस्पेक्टर, पीसीआई लखनऊ से फाइलेरिया समन्वयक अनूप दूबे, शहरी स्वास्थ्य समन्वयक, बीसीपीएम व चिकित्सा अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। 

हर साल चलाया जाता है अभियान 

बांदा। जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार ने बताया कि हालांकि फाइलेरिया जानलेवा बीमारी नहीं है पर यह रोगी के लिए उम्र भर काफी पीड़ादायक हो सकती है। इसलिए हर साल सरकार द्वारा राष्ट्रीय फाइलेरिया
प्रशिक्षणार्थी
नियंत्रण कार्यक्रम के तहत अभियान चलाकर संभावित मरीजों को इसकी मुफ्त दवा खिलाई जाती है। वर्ष 2017-18 और 2018-19 में अभियान के दौरान क्रमशः 129 और 84 संभावित मरीज पाए गए थे। वहीं अप्रैल 2019 से अब तक जिला अस्पताल में कैंप लगाकर 15 मरीजों का हाइड्रोसील का निःशुल्क आपरेशन कराया गया है। इस बार अभियान में लगभग 19 लाख आबादी को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है।    

No comments