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कड़कनाथ मूर्गा की विशेष प्रजाति किसान के लिये उपयोगी

हमीरपुर, महेश अवस्थी । कृषि विज्ञान केन्द्र के डाॅ मो0 मुस्तफा ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र जरिये विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण चलाये जा रहे हैं। आरसेटी के अधिकारियों व कर्मचारियों से कहा कि अधिक से अधिक किसानों को केवीके में लाकर नई तकनीक से लाभान्वित करायें ताकि कृषि क्षेत्र के विकास के साथ किसानों का भी विकास हो सके। ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा पशुपालन और कृषि से संबंधित प्रशिक्षण में वे बोल रहे थे। केन्द्र के वैज्ञानिक डाॅ एसपी सोनकर ने कहा कि कड़कनाथ मूर्गा की जो विशेष पहचान और खासियत है उसका काला रंग, काला खून, काला गोश्त, काली हड्डी और काला अण्डा है। काले मीट के रूप में

भी जाना जाता है। क्योंकि इसमें प्रोटीन और आयरन अधिक होता है। कोलस्ट्राॅल, बसा अन्य मुर्गे की तुलना में कम होता है। इस मूर्गे को खाने से पाचन शीघ्र हो जाता है। कई रोगों के प्रति सहनशक्ति आ जाती है। स्वास्थ्यवर्धक, क्षमतावर्धक जैसे विशेष गुण के लिये अपनी पहचान रखता है। यह मूर्गा 3.5 से 4 महीने में तैयार हो जाता है और बाजार में सामान्य मूर्गे की तुलना में 800 से 1000 रुपया प्रति किग्रा में बिकता है। जिससे किसान अधिक कमाई कर सकते हैं। सजीव प्रदर्शन के लिये पशु पालन इकाई में थारपारकर गाय और वर्ष भर बहुवर्षीय चारा किसान भाईयों को दिखाया गया। जिससे किसान उत्साहित हुये। डाॅ फूल कुमारी ने पोषणवाटिया पर चर्चा करते हुये परिवार के लिये गुणवत्तायुक्त सब्जी उत्पादन के साथ-साथ मूल्यसंवर्धन पर जोर दिया। योगेन्द्र कुमार, विनीता अग्रवाल, वन्या पाण्डेय ने भी विचार रखे।

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