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Saturday, January 4, 2020

शिक्षा में सुधार होना संभव नहीं

 देवेश प्रताप सिंह राठौर 
(वरिष्ठ पत्रकार)

आज पूरा भारत आज शिक्षित होने की हर जनमानस में एक इच्छा जागृत है ,पर उच्च शिक्षा का स्तर इतना महंगा इतना अधिक व्यवसाई को गया है कि हर व्यक्त अपने बच्चों को अपने मन की शिक्षा देने में असमर्थ है। शिक्षा में हमारे देश के प्रधानमंत्री से लेकर प्रदेश के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री योगी जी ने भी शिक्षा के क्षेत्र में कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया परंतु कुरीतियां दूर होने का नाम नहीं ले रही है यहां तक कि वसिक  शिक्षाके ऊपर जैसे हाई स्कूल इंटर में सीबीएसई बोर्ड आईआईएससी बोर्ड में बच्चों को पढ़ाना साधारण स्कूल में भी एक बहुत बड़ी खर्चे की स्थिति उत्पन्न हो गई है हर मां-बाप चाहते हैं कि मेरा बच्चा अच्छे स्कूल में पढ़े पर पूरे प्रदेश में स्कूलों की स्थिति इतनी बदतर है सिर्फ दिखावा है पैसा लूटना है पढ़ाई के नाम पर जीरो है ,बच्चे अगर घर पर ना पड़े उनका पढ़ाई का स्थित और भी बदतर हो सकती है और हो रही है। आज इंटर से लेकर ऊपर क्लास में जाइए आप विश्वविद्यालय के हाल यूनिवर्सिटीओ की स्थिति इतनी खराब है कि वहां का प्रोफेसर दोहा का अध्यापक वहां का लेक्चरर स्वयं अपने को तानाशाह समझता है उसका साफ कहना होता है कि मेरा अटैचमेंट राजपाल से है मुझे कोई भी सरकार कुछ नहीं कर सकती मेरा मुखिया राजपाल उड़ा होता है महोदय

इस धारणा से जप यूनिवर्सिटी के स्पेशल शिक्षा हेतु कार्य करेंगे तो आप समझ लीजिए शिक्षा के स्तर क्या होगा इसी क्रम में मैंने कुछ स्कूलों का सर्वे किया उसमें मैंने पाया है, झांसी यूनिवर्सिटी सन 1975 से इसका न्यू रखी गई थी सन 75 के बाद बहुत ही वाइस चांसलर आए परंतु एक वाइस चांसलर यहां पर आए जिन्होंने आज अपनी छाप लोगों के दिलों में छोड़ रखी है वह है डॉ रमेश चंद्र जो वर्ष 1999 से वर्ष 2005 तक वाइस चांसलर झांसी यूनिवर्सिटी के रहे जितना भी विकास हुआ है झांसी यूनिवर्सिटी का मौसम वाइस एडमिरल डॉ रमेश चंद्र ज़ी टीवी पेन है उसके बाद श्रब उजड़ा ही है बना कुछ नहीं है इसी क्रम में हम जलाते हैं वहां के प्रोफेसरों के बारे में जानना चाहा मैंने वहां के प्रमोटर है हिंदी विभाग के डॉक्टर मुन्ना तिवारी, एवं आरके सैनी  कुलान शासक, एवं धीरेंद्र शर्मा जो समन्वयक के पद पर हैं, जब मै स्कूल की हकीकत जानने के लिए निकला काफी शिकायतें स्कूलों के छात्रों की देख कर मन दुखी हुआ वहां के छात्रों से जब पूछाउन्होंने जोबताया की झांसी बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी में कोई पढ़ाई नहीं होती है, भ्रष्टाचारी चरम पर है सारे प्रोफेसर अपने व्यक्तिगत कार्यों में लगे रहते हैं और समय से अपने चेंबर में नहीं आते न कक्षा अटेंड करते हैं ,इसी को ध्यान रखते हुए मैंने झांसी यूनिवर्सिटी का एक गोपनीय सर्वे किया जिसमें हिंदी विभाग के मुन्ना तिवारी जी जो हमें 11:45 बजे के लगभग दोपहर को उनका ऑफिस वंद मिला और उनके समकक्ष जो रूम थे सफाई सफाई कर रहा था और एक फोर्थ क्लास एम्पलाई वहां पर था, मैंने पूछा कि यह लोग कब आते हैं कहा इनका कोई आने का टाइम नहीं कोई ना जाने का टाइम है इनके बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है मेरा काम है  वह मैं कर रहा हूंमैंने ऑफिस मैंने अभी खोला है क्या रोज आप इस इस इस टाइम आप खोल खोलते हैं सर जी आप हमसे क्यों पूछ रहे हैं आप यहां के बारे में नए है क्या जानते नहीं हैं मैंने कहा ठीक है जबमैंने कहा सर्दी है क्या इसके पहले समय से आना होता होगा अरे सर मैंने बोला आपको सर उनका कोई आने का समय नहीं होता है, क्या क्लास में जाते हैं इसतरह से सर कुछ नहीं बता पाऊंगा बड़ी स्थितियां खराब है आप खुद समझदार हैं जानते है, मैं वहां से निकल कर आगे चला और कालेज के बारे में जानकारी चाहिए कालेज की छात्राएं बोली सर हम क्या बताएं आपको जानते यहां कितनी गंदगी है कोई कुछ नहीं सुनता है सब यहां पर गड़बड़ है कानून पता नहीं क्या करता है, किसी को कुछ दिखाई नहीं देता है झांसी यूनिवर्सिटी में कितनी भ्रष्टाचारी है एक छात्रा की जुबान से बोला और मैं थोड़ा आगे बढ़ा तो मुझ4 और 5 छात्र दिखाई दिएदिखाई दिए मैंने उनसे पूछा बच्चे यहां कैसी पढ़ाई होती है प्रोफ़ेसर क्लास में आते हैं कहा नहीं अंकल कभी कदार आ जाते हैं कुछ खास बताना होता हैऔर यहां कोई नहीं आता है सब बहुत ही विचित्र लोग हैं,बिहार के प्रोफेसर तो पढ़ाने वाले कम लगते हैं इनकी भाषा शैली पूर्ण गुंडागर्दी की तरह होती है अंकल जी और जो पैसा देता रहता उसके सब काम होते रहते हैं ,और भी बहुत कुछ है अंकल जी यहां पर मैं नहीं बता सकता आपको हम ललितपुर के हैं गरीब घर के हैं हम यहां पर 2000 का कमरा किराए पर लिए हुए हैं 3 लोग रहते हैं पापा किसानी करते हैं क्या करें मां-बाप सोचते हैं कि यहां पड़ाई होती है औरभेज देते जबरदस्ती लेकिन यहां पर हम लोग कोचिंग सस्ती पढ़ाई ना होने के कारण जाते हैं, झांसी यूनिवर्सिटी का वहां पर आप चले जाइए झांसी यूनिवर्सिटी के अंदर हर चीज झारखंड लगती है कहीं कोई भी व्यवस्थित सफाई नहीं है जबकि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी स्वच्छ भारत का निर्माण चाहते हैं और जहां से निकले हुए बच्चे खुद स्वच्छता हीन महसूस करते  किस तरहहम समय धन संबंधी अभाव के कारण  गुजार रहे हैं। वह आगे क्या संदेश लेकर जाएंगे आज की इस मानसिकता को सुधारने की जरूरत है जो यह लोग सोच बनी है की मेरा कोई कुछ कर नहीं सकता है।  कुलसचिव वगैरा से फोन मिलाया किन बच्चों की बात रख सकूं पर बात करना चाहा लेकिन बात नहीं हो सकी । वाइस चांसलर का भी फोन द्वारा बात नहीं हो सकी ,लेकिन मुझे लगता है यह सब ही लोग एक दूसरे के मिली जुली असर का ही परिणाम है जो आज झांसी यूनिवर्सिटी नर्क बन गया है शिक्षा के नाम से बच्चे गांव देहात के मजबूर होकर यहां एडमिशन कराते हैं धन के अभाव में जब उन्हें पढ़ने वाले बच्चों को उचित शिक्षा नहीं प्राप्त होती है तो मायूस होकर इधर-उधर भटकते हैं ,और मां-बाप किस तरह पैसे जुटाकर उनको कोचिंग में पढ़ाने का प्रयास करते हैं जो अपने बच्चे केसपने सच हुए होते हैं अपनी किसान मजदूरी की कमाई को एक आस लगाकर बैठे अपने बेटे से जो यहां का यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली जो उनके मंसूबों को चूर-चूर कर रही है।उन्हें पूरा करने के लिए हर मां बाप तेजी से खुद ना खाकर बच्चे के लिए व्यवस्था एवम् प्रयास करता ही है लेकिन इन जैसे प्रोफेसरों का कालेजों में कार्य के प्रति लापरवाही क क्या दर्शाती है कि माननीय प्रधानमंत्री माननीय मुख्यमंत्री योगी जी भ्रष्टाचारी तो दूर करना चाहते हैं परंतु भ्रष्टाचारी हमारी नीेव से लेकर उच्च शिक्षा तक भ्रष्टाचारी पूरी शिक्षा से संबंधित जड़ों में घुसी है ,जब तक हम शिक्षा के क्षेत्र में भ्रष्टाचार से मुक्त नहीं करेंगे तब तक  हमारे संस्कारों में का ज्ञान भाव आना संभव नहीं है। आज छोटे छोटे स्कूलों में हम बच्चों को पढ़ाते हैं सबसे साधारण स्थित हुए तो दो  या₹चार हजार मंथली फीस देने की स्थिति बनती है इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार ने कानून बनाया था परन्तु इसमें प्राइवेट स्कूलों पर कुछ अंकुश लगाने का प्रावधान किया था परंतु शिक्षा विभाग के बाहुबली स्कूल के मालिक आने के कारणअपने को इतना मजबूत कर रखा है राजनीति और धन से इस देश में वह किसी भी  कार्रवाई की चिंता नहीं करते हैं, और वह धन किसी न किसी रूप में वह पूरा करने की नियत बना ही देते हैं उसी नियत के तहत आज शिक्षा के क्षेत्र में वाहुवली बड़े राजनीतिक के लोगों का संरक्षण पर व्याप्त होता है ।उन्हें मालूम है कि आम जनमानस और मीडिया का कोई भी व्यक्ति तुम्हारा क्या कर सकेंगे रही बात मुख्यमंत्री और राज्यपाल और यह ऊपर केंद्र में शिकायत जाएगी तो हाथों से सारे राजनीतिक दल अपने मौजूद ही है। यह भ्रष्टाचारी के दूर करने वाले लोग हमारा क्या कर पाएंगे यह सोच बनाकर आज भी जमकर शिक्षा के क्षेत्र में भ्रष्टाचारी हो रही है। और राजनीतिक दल बड़े बड़े माफिया से उनको संरक्षण प्राप्त है और राजनीत हो बड़े बड़े माफिया राजनीतिक घराने से शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं जिसके कारण शिक्षा में सुधार के संकेत प्राप्त नहीं हो रहे हैं और ना हीकोई भी अच्छे संकेत मिलने की उम्मीद ना के बराबर है। झांसी यूनिवर्सिटी के सारे सीसीटी कैमरा खराब पड़े हुए हैं जिन्हें ना बनवाने की कभी सोची ही नहींगई है, क्योंकि अगर सीसीटीवी कैमरा ठीक बनवा दिए जाएंगे तो इनकी हकीकत है बच्चों के साथ उत्पीड़न का दृश्य सामने आ सकता है क्योंकि जानबूझकर सीसीटीवी कैमरे लगने के तुरंत बाद ही खराब स्थिति में पड़े हैं ऐसी जानकारी प्राप्त हुई है।

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