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Sunday, January 12, 2020

प्रसव पूर्व जांच कराने से जच्चा-बच्चा होते हैं सुरक्षित

जिले में 1953 महिलायें एचआरपी में बीते साल चिन्हित

हमीरपुर, महेश अवस्थी । प्रसव पूर्व होने वाली चार प्रमुख जांचों को कराने में हीलाहवाली एन वक्त पर गम्भीर समस्या बन सकती है, इसलिये इनकी जांच प्राथमिकता पर कराकर निदान किया जा सकता है और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव होता है। फतेहपुर जिले की अमौल कस्बे की नीलम 30 वर्ष पत्नी जयहिन्द दूसरी बार मां बनने वाली थी। मामला फंस गया। अगर समय से आॅपरेशन न होता तो जच्चा-बच्चा दोनों मुश्किल में हो जाते, क्यों बच्चा फंसा हुआ था। नीलम का केस कोई पहला और आखिरी नहीं हैं। दिसम्बर महीने में अस्पताल में 127 हाईरिस्क प्रेगनेन्सी के सुरक्षित प्रसव कराये गये। डाॅ आशा सचान बताती हैं कि नीलम को यहां लाने से पहले सरकारी अस्पताल अमौली में भर्ती कराया गया था, जब हालत बिगड़ी तब वे यहां लाये। हालांकि पहला बच्चा नाॅर्मल हुआ था। दूसरे बच्चे में बिना आॅपरेशन के डिविलरी कराना असंभव था। लिहाजा जच्चा-बच्चा दोनों की जान बचाने के लिये यह कदम उठाना पड़ा। अब नीलम स्वस्थ्य हैं। इसी प्रकार सुभाष बाजार के गौरव की
पत्नी लक्ष्मी की भी सिजेरियन डिलिवरी हुई। लक्ष्मी का यह पहला बच्चा था। डाॅ ने डिलिवरी की जो डेट दी थी, उससे ज्यादा समय हो चुका था। इसलिये आॅपरेशन कराना मजबूरी था। डाॅ आशा सचान बताती हैं कि डिलिवरी के कुछ मामले एन मौके पर फंस जाते हैं। कई बार महिलाओं की स्थिति बेहतर होती है, लेकिन वे पूर्व में जो जांचें कराने होती हैं उसमें रूचि नहीं दिखाती और प्रसव के हालत बिगड़ने लगती है। दिसम्बर, 2019 में अस्पताल में 305 महिलाओं के प्रसव हुये। जिसमें 127 महिलायें हाई रिस्क प्रेगनेंसी में थी। ऐसे में ज्यादातर महिलाओं में हेमोग्लोबीन की कमी होती है या गर्भ के बच्चे की स्थिति में परिर्वतन होता है या फिर दो या उससे अधिक बार कच्चा बच्चा गिर जाता है या बच्चा पेट में मर जाता है या कोई विकृति वाला बच्चा पैदा होता है। प्रसव के दौरान या बाद में अधिक ब्लीडिंग होना भी इसका लंक्षण है। हाई ब्लेडप्रेसर की मरीज के महिलाओं को दिक्कत होती है। बीते साल 16503 प्रसव में 1953 महिलायें उच्च जोखिम वाली गर्भवती मिलीं। गर्भावस्था में छोटी-छोटी लापरवाही महिलाओं को एचआरपी की श्रेणी में ले जाती हैं। उचित देखभाल, खानपान से इससे बचा जा सकता है।

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