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भव्य और व्यापक होगा रामायण मेला: करवरिया

47वें रामायण मेला को उद्देश्यपरक, रुचिकर आयोजन की चल रही तैयारियां
कलाकारों व विद्वतजनों की मिल चुकी हैं स्वीकृति

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरी । भगवान श्रीराम की तपोस्थली में विगत वर्ष 1973 से आयोजित हो रहे देश का बहुमान्य समारोह रामायण मेले का 47वां महोत्सव इस वर्ष 21 से 25 फरवरी तक होने जा रहा है। मेला प्रांतीयकृत घोषित हो चुका है। जिसके चलते आगामी महोत्सव भव्य एवं व्यापक रूप से आयोजित होने की प्रबल संभावनाएं हैं। मेले के आयोजकों ने उद्घाटन के लिए मुख्यमंत्री से संपर्क किया है। उनके आने का आश्वासन मिला है।

भव्य और व्यापक होगा रामायण मेला: करवरिया
उक्त जानकारी रामायण मेले के अध्यक्ष राजेश करवरिया एवं महामंत्री डा करुणा शंकर द्विवेदी ने संयुक्त रूप से देते हुए बताया कि रामायण मेला की परिकल्पना वर्ष 1960 में समाजवादी चिंतक डा राममनोहर लोहिया ने की थी, लेकिन इसे साकार करने में आचार्य डा बाबूलाल गर्ग के अथक परिश्रम को जाता है। डा गर्ग के साथ मेला को संस्थागत रूप देने और स्थायित्व प्रदान करने में तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष गोपाल कृष्ण करवरिया की अहम भूमिका रही है। मेले की ख्याति देश के सभी भागों तक पहुंचाने में उक्त द्वेय स्तुल्य कार्य किया है। उन्होंने बताया कि दुर्भाग्य से दोनो अब हमारे बीच नहीं है। मेले की खड़ी की गई मजबूत नींव आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी। उक्त द्वेय ने बताया कि समाज दोनो महापुरुषों का सदैव ऋणी रहेगा। रामायण मेले के आयोजकों ने निरंतर देशभर के विद्वानो, राजनेताओं और अलग-अलग क्षेत्रों के महापुरुषों से संपर्क जारी रखा। अंततः वर्ष 1973 में पहली बार मेला को आयोजित करने में सफल हुए। उन्होंने बताया कि यह मेला इतना भव्य हुआ कि मील का पत्थर बन गया। इसका उद्घाटन तत्कालीन चेयरमैन रेवन्यू बोर्ड उप्र तथा कार्यकारी अध्यक्ष उत्तर प्रदेशीय मानस चतुहसती समिति डा जनार्दन दत्त शुक्ल (आईपीसी) एवं समापन उप्र के तत्कालीन राज्यपाल अकबर अली खा ने किया था। 

मेले के अध्यक्ष राजेश कुमार करवरिया ने बताया कि मेला की परिकल्पना और पूर्वजों द्वारा जो रास्ता दर्शाया गया उसका अनुकरण करते हुए रामायण मेले को नित नूतन स्वरूप देने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। आगामी समारोह की तैयारियां व्यापक स्तर पर जारी है। रामायण मेला भवन के साजसज्जा के साथ ही अन्य आवश्यक कार्य समय पर सम्पादित करने में समिति के सदस्य एवं कार्यकर्ता जुटे हैं। डा करुणा शंकर द्विवेदी ने बताया कि आगामी महोत्सव उद्देश्यपरक और रुचिकर बनाने की दिशा में मेले के आयोजकों ने रामकथा के मर्मज्ञ, विद्वानो, ख्यातिलब्ध कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। बताया कि अभी तक जगदगुरु शंकराचार्य, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती प्रयाग, जगदगुरु रामनुजाचार्य, विद्या भास्कर स्वामी वासुदेवाचार्य अयोध्या महामण्डलेश्वर पंचदशनाम जूना अखाडा, स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि हरिद्वार, जगदगुरु कामदपीठ स्वामी रामस्वरूपाचार्य चित्रकूट, साध्वी पूनम दास बलिया, पं रामदेव शर्मा मुजफ्फर नगर, सीताराम शरण रामायणी छिंदवाड़ा, रघुनाथ प्रसाद रामायणी मानस मुक्त यशुमति, प्रो योगेशचन्द्र दुबे, प्रो मिथला प्रसाद त्रिपाठी इंदौर, डा आर्या प्रसाद द्विवेदी गोरखपुर, रमेशचन्द्र तिवारी, डा अवधेश कुमार शुक्ला, डा अशोक त्रिपाठी वद्र्धा, डा कृष्णमणि चतुर्वेदी, डा अशोक कुमार द्विवेदी चेन्नई, डा पुट्टपर्तिनाम पदमिनी एवं डा एम अन्नालक्ष्मी हैदराबाद, डा शेषारत्नम विशाखापटनम, डा विनय पाठक विलासपुर, महाकवि मोहन दुखुन सिलिगुडी, डा चन्द्रिका प्रसाद दीक्षित, डा देवेन्द्र चन्द्र दास गुवाहटी, डा जंगबहादुर रांची आदि विद्वानों की स्वीकृतियां अभी तक प्राप्त हो चुकी है।
मेले के अध्यक्ष एवं महामंत्री ने बताया कि 21 फरवरी को भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से भजन संगीत, लोकगीत, नृत्य, 22 फरवरी को केया चन्दा एवं साथी कोलकाता कत्थक नृत्य, 23 फरवरी को रिवाइबल गु्रप आफ इण्डिया नई दिल्ली, रामाण ध्वनि एवं प्रकाश, 24 फरवरी को शास्त्रीय केन्द्र गुवाहटी, आकाशवाणी इलाहाबाद की ओर से रामकथा आधारित लोकगीत व नौटंकी प्रस्तुत करेंगें। 25 फरवरी को जवाहरलाल नेहरू मणिपुर डांस एकडमी इम्फाल कला संस्थानों की स्वीकृतियां मिल चुकी है। इसके अलावा वृंदावन रासलीला संस्थान प्रतिदिन प्रातः एवं रात्रि में रामलीला व रासलीला का भव्य प्रस्तुतीकरण करेंगें। उन्होंने बताया कि आयोजन को सफल बनाने के लिए अनेक उप समितियों को गठन किया गया है जो अतिथियों के आवास, परिभ्रमण, भोजन, मंच आदि व्यवस्था देखेंगें। जिलाधिकारी शेषमणि पाण्डेय के मंशानुसार जन मेला बनाया जाएगा। जिसके लिए अधिकारियों की सेमितियां है जो अपने कार्य में तत्पर हैं। उन्होंने बताया कि प्रांतीय मेला घोषित होने के चलते समन्वय के साथ काम होगा।

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